COPYRIGHT © Rajiv Mani, Journalist, Patna

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सोमवार, 21 अगस्त 2017

दाई अम्मा

Poonam Tan
 कहानी /  पूनम टांक  
भगवती देवी बूढ़ी विधवा महिला है। वह वर्षों से मोहल्ले के पास बने एक विद्यालय में दाई का काम करती है। बस इस कारण ही विद्यालय के साथ-साथ सारा मोहल्ला भी उन्हें दाई अम्मा ही कहता है। दाई अम्मा जितनी दयालु और स्नेहमयी हैं, उतनी ही कर्मठ भी हैं। अगर एक बार किसी काम के बारे में ठान ले, तो चाहे उन्हें आकाश-पाताल क्यूं ना एक करना पड़े, उस काम को पूरा करके ही दम लेती हैं।
दाई अम्मा ने अपनी पूरी जवानी इसी विद्यालय में काम करते-करते गुजार दी। अब तो उनके आगे के बाल भी काफी हद तक सफेद हो चुके हैं। दोनों गाल दांतों के टूटने के कारण थोड़ा पिचक से गये हैं। काया भी अब काफी ढल चुकी है, पर उनके काम करने की क्षमता अभी भी किसी जवान औरत से कम नहीं है। जब तक और लोग किसी काम को करने की सोचें, तब तक तो अम्मा झट-पट उस काम को निपटा कर वापस भी आ जाती हैं। शायद यही कारण है कि विद्यालय के साथ-साथ पूरे मोहल्ले में अम्मा की बड़ी पूछ रहती है। 
उस दिन भी दाई अम्मा एक-एक कर चाय के गिलास चमका रहीं थी, तभी विद्यालय की एक नयी अध्यापिका उमा बहन जी उनसे पूछ बैठी। ‘‘अरे अम्मा! तुम यहां अकेले ही रहती हो, घर में और कोई नहीं है क्या? अकेले तो बड़े मुश्किल से समय कटता होगा ना?’’
बहन जी का इतना कहना था कि अम्मा के हाथों से काम छूट गया और वो आखों में आंसू भर कर कहने लगीं ... ‘‘अब का बताये बहन जी, हम तो कभी आपन जिन्दगी में सुख नाहीं देखे। छोट के रहे तबहीं अम्मा बाबू बिहा कर दिहें। ससुरे आये तो मनसेधु हमका छोड़ सहर चले गये। जब सोलह-सत्रह साल के हुये, तो भगवान हमरी झोली में एक बेटवा डाल दीहैं। भोले के बप्पा हम दोनों का लइके सहर आये गये। मुला का जाने हमार भोले के कौन रोग लग गवा रहा कि छह महिन्ना भी हमरे पास न रहे पाये। भोला के गम मा उनके बप्पा भी भगवान के पास पहुंच गये। बस तब से आप लोगन के सहारे जी रहे हंै।’’ 
दाई अम्मा की कथा लगभग सभी लोग जानते थे, क्यांेकि उन्होंने आजतक अपने जीवन के एक-एक पल को मुठ्ठी में जो जकड़ रखा था, पर शायद इसी बीते हुये कल से उन्होंने अकेले जीना सीखा था। दाई अम्मा के पति बहुत पहले से ही इसी विद्यालय में माली का काम किया करते थे। पति और बेटे के गुजर जाने के बाद सब के होते हुये भी अम्मा बेसहारा हो गयीं, वो तो भला हो मैनेजर साहब का जो उन्होंने अम्मा को यहीं पर दाई की नौकरी दे दी और रहने की जगह भी। अम्मा बहुत ही कामकाजी थी, इसलिये वो विद्यालय के साथ-साथ मैनेजर साहब के घर में भी काम कर दिया करती थी।
अम्मा को शहर में आये लगभग पंैतिस-चालीस साल गुजर चुके थे, मगर परिवार के किसी भी सदस्य ने उनकी सुध न ली। हां, कभी-कभी उनका भाई जरूर आ धमकता और तबतक ना टलता, जबतक उनसे रुपये न ऐंठ लेता। 
आजकल विद्यालय के आसपास की जमीन बड़ी तेजी से बिक रही थी और उस पर बडे़-बडे़ आलीशन मकान बनकर तैयार हो रहे थे। उन्हें देख-देख कर अम्मा की सूनी आंखों में भी एक सपना पलने लगा, अपनी छत बनाने का सपना। अब यदि अम्मा ने कुछ ठाना तो उसे पूरा किये बिना वे कहां दम लेने वाली थी। एक बडे़ से आलीशान मकान के बगल थोड़ा-सा जमीन का टुकड़ा बच गया था, अब क्योंकि टुकड़ा तिकोना होने के साथ-साथ गड्ढेदार भी था, तो कोई भी उसे लेने को तैयार ना था और बेचने वाला उसे औने-पौने दाम में देने को तैयार बैठा था। जब अम्मा को पता लगा कि टुकड़ा उनका हो सकता ह,ै तो उनकी खुशी का ठिकाना ही ना रहा। अम्मा ने अपनी सारी जमा पूंजी लगाकर उसे खरीद लिया। जब उन्होंने अपनी जमीन के कागज पर अंगूठा लगाया, तो उनकी बूढ़ी आंखों में खुशी की चमक थी और होठों पर मुस्कुराहट। 
अम्मा दिन भर स्कूल मंे रहती और शाम होते ही एक फावड़ा और तसला ले अपनी जमीन पर पहुंच जाती और मिट्टी खोद-खोद कर गड्ढे़ को समतल करती जाती। जब स्कूल की छुट्टियां पड़ी, तो अम्मा ने सोचा कि इन दो महीनों में उन्हें कैसे भी करके अपनी सर पर छत रखनी ही पड़ेगी। वे दिन भर चिलचिलाती धूप मेें काम करती, कभी नेव खोदती, तो कभी मिट्टी सान-सान कर गारा तैयार करती, भला और करती भी क्या, उनकी सारी जमा पंूजी तो पहले ही जमीन खरीदने मंे खर्च ही चुकी थी। मैनेजर साहब के यहां काफी पुरानी ईंट पड़ी थी और कुछ रेत भी जो उन्होंने अम्मा को दे दी थी, साथ ही साथ तीस हजार रुपये भी दिये थे, जिसे अम्मा ने इसी शर्त पर लिया था कि मकान पूरा होते ही वे मैनेजर साहब के यहां दोनों मिटिंग तबतक मुफ्त में काम करेगी, जबतक उनकी पाई-पाई न चुका दे। मैनेजर साहब अम्मा के आत्म सम्मान को ठेस नहीं पहंुचना चाहते थे, इसलिये उन्होनें अम्मा की शर्त मान ली।
मकान बनने तक अम्मा का भाई कई बार शहर आया पर उससे मदद की कोई उम्मीद ही कहां थी। अम्मा भूखी-प्यासी दिन-रात बस काम में लगी रहती। उनकी मेहनत देखहर हर कोई हैरान रह जाता। आज अम्मा को देखा, उन्होंने छोटे-छोटे छींट की चिट्ठी धोती पहन रखी थी, बालों को तेल लगाकर जूड़ा बांध रखा था। धूप मंे काम करने से उनका रंग तो काफी दब गया था और काया भी काफी ढल गयी थी, फिर भी चेहरे पर एक अलग ही तेज दिख रहा था। हां भाई, आज हमारी अम्मा की मेहनत रंग लायी थी, उनका मकान बनकर तैयार हो गया था। आलीशान बंगले के ठीक बगल, छोटा-सा सफेद रंग से पुता हुआ मकान। अम्मा सबके घर जाकर उन्हें अपना मकान पूरा होने की बात बता-बता कर खुशी से फूले नहीं समा रही थी। 
बगल की मालती आंटी को जब अम्मा ने लड्डू देते हुये अपनी खुशी बतायी, तो वे तपाक से बोल पड़ीं - ‘‘क्यूं अम्मा, घर तो बनवा लिया पर ना तो घर बुलाया ना दावत की बस ऐसे ही सूखा-सूखा।’’ 
अम्मा उनका व्यंग समझ चुकी थी, फिर भी थोड़ा ठहर के बोली, ‘‘हम तो खुद ही सबको बुलाते, लेकिन आप के बड़े लोग हम गरीब के घर आये ई शोभा नाहीं देता।’’
‘‘वैसे कितने कमरें बनवा लिये हैं अम्मा?’’ मालती आंटी ने मुंह मटकाते हुये कहा।
इस बार अम्मा बडे़ पे्रम और थोड़ा गर्व के साथ बोलीं। ‘‘दुई कमरा है, अब हमका अउर कुछ न चाहीं, बस आपन घरे में आपन छत के नीचे सुकून से रहब।’’
अम्मा की बाते सुन आलीशान घर में रहने वाली मालती आंटी आज न जाने क्यूं अपने को बहुत छोटा महसूस कर रही थी।
अम्मा का घर बन गया। यह खबर पाकर भईया-भाभी, बहन-बहनोई, बच्चे सब धीरे-धीरे शहर आ पहुंचे। परिवार के लोगों को देखते ही अम्मा अपनी सब दुःख तकलीफें भूल गयीं और सबको अपना लिया। कुछ दिन रूकने के बाद सब लोग तो चले गये, लेकिन बहन का बेटा वहीं रह गया। 
अम्मा ने राजन को पढ़ाया, दुकान खुलवाई, फिर उसकी शादी करवा दी। नयी बहू के आने से घर में रौनक-सी आ गयी और अम्मा को भी दो वक्त की रोटी समय पर मिलने लगी।
एकदिन अम्मा का भाई फिर शहर आया, पर इस बार वो अपना पूरा परिवार साथ ले आया था। अम्मा को देखते ही वह फूट कर रोने लगा। अम्मा का दिल तो बैठा जा रहा था, बहुत पूछने पर वो बोला - ‘‘दीदी, बिटिया की शादी की खातिर घर गिरवी रखे रहे, अब महाजन ओपर कब्जा कर लिहे, हम तो बेघर हो गये दीदी अब कहां जाई।’’ 
अम्मा भी बड़ी देर तक भाई के दुःख में रोती रही, फिर बोली - ‘‘कउनौ बात नाहीं, राम भरोसे जबतक तुम्हार घर तुमका ना मिल जाये, तुम इंहयी रहौ।’’
बस उस दिन से एक कमरे में राजन अपने बच्चों के साथ रहने लगे और दूसरे में राम भरोसे। अम्मा का तख्त घर में से निकालकर बाहर डाल दिया गया। समय बीतने के साथ-साथ अम्मा का पौरूख भी खत्म हो गया। अब अम्मा अकेले एक तख्त पर पड़ी रहती। अगर कोई मोहल्ले का तरस खाकर अम्मा को कुछ खाने को दे देता, तो अम्मा बिना अपने आत्म सम्मान की दुहाई दिये उसे चुपचाप खा लेती। सुबह से शाम तक बहू और भौजाई अम्मा से लड़ती रहती। कहती - ‘‘का जाने ई बुढ़िया कब मरी, सारे घरवा पर नागिन हस कुंडली मारे बईठी है। अब हम पचे चली आपन पेट पाली कि इनका बढ़िया-बढ़िया बनाये के देयी।’’
राजन और राम भरोसे तो इसी जुगत में रहते कि अम्मा कब अपना घर उनके नाम कर दे। जब अम्मा में उन सब की बातों को सुनने का साहस खत्म होने लगता और वे उनकी जली-कटी बातों को सुन-सुन कर तंग हो जाती, तो रो-रोकर दबी जबान से कहने लगती - ‘‘हमार मनसेधू तो अकेले चला गवा अउर हमका ई नरक भोगे खातिर इहां छोड़ गवा, का जाने कब भगवान हमहूं का आपन लगे बुलइहै।’’
दाई अम्मा के आंसू एक बार ढलकने लगते तो रात भर बहते रहते।
पूनम टांक इलाहाबाद की रहने वाली हैं और इनकी कहानियां विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है।
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बुधवार, 26 जुलाई 2017

22 राज्यों में चुंगी (चेक पोस्ट) समाप्त

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) 1 जुलाई, 2017 से लागू किया गया है। इसके लागू होते ही भारत में 22 राज्यों के सभी चुंगी (चेक पोस्ट) समाप्त कर दिये गये हैं।
विवरण इस प्रकार हैं : आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, गुजरात, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, सिक्किम, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गोवा, हरियाणा, झारखंड, ओडिशा, पुडुचेरी, राजस्थान, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड।
राज्य जहां चुंगियों (चेक पोस्ट) को समाप्त करने की प्रक्रिया जारी है : असम, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, नागालैंड, पंजाब, मिजोरम, त्रिपुरा।

जेल बंदियों के लिए वेब एप्लीकेशन लांच 

नई दिल्ली : राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) को जेल में कैद बंदियों को कानूनी सहायता प्रदान करने की जिम्मेदारी दी गई है। 28 जून, 2017 को भारतीय विधि संस्थान में आयोजित सम्मेलन में एनएएलएसए ने जेल बंदियों को निःशुल्क कानूनी सेवाएं देने के लिए वेब एप्लीकेशन लांच और एनआईसी के माध्यम से विकसित कानूनी सेवा प्रबंधन प्रणाली लांच किया। वेब एप्लीकेशन के माध्यम से राज्य कानूनी सेवा प्राधिकार तथा जिला कानूनी सेवा प्राधिकार अपने / अपने क्षेत्राधिकार के जेलों में प्रत्येक बंदी के लिए डाटा भरेंगे, ताकि अदालत में वकील के जरिये उनका प्रतिनिधित्व किया जा सके। यह साफ्टवेयर अपनी रिपोर्ट में कैदियों की कुल संख्या, बिना वकील वाले कैदियों की कुल संख्या, कानूनी सेवा अधिवक्ताओं द्वारा प्रतिनिधित्व किए गए बंदियों की संख्या और अपने निजी वकीलों द्वारा प्रतिनिधित्व कैदियों की संख्या का पता लग जायेगा।
सभी सूचनाएं राज्यवार, जिलेवार, और प्रत्येक जेल के संबंध में उपलब्ध होंगी। रिपोर्ट में कैदी के बंद रहने की अवधि की जानकारी मिलेगी और इससे यह सूचना प्राप्त होगी कि अपराध प्रक्रिया संहिता के सेक्शन 436 (ए) के तहत बंदी जमानत का पात्र है या नहीं। यह वेब एप्लीकेशन कानूनी सेवा प्रणाली को और पारदर्शी बनाएगा और कहीं से भी सभी सक्षम पदाधिकारी कैदियों को दी जाने वाली कानूनी सहायता की अनुमति पर नजर रख सकेंगे, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि अदालत में पेशी के पहले दिन से सभी बंदियों का प्रतिनिधित्व प्राप्त है।
वेब एप्लीकेशन उच्चतम न्यायलय के न्यायाधीश और एनएएलएसए के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा ने लांच किया। इस अवसर पर 18 राज्यों के कानूनी सेवा प्राधिकार के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सदस्य सचिव शामिल हुए। वेब एप्लीकेशन लांच होने के बाद एनआईसीपीटी ने ओरियेंटेशन सत्र का आयोजन किया।
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गुरुवार, 29 जून 2017

अनुकंपा के आधार पर ग्रामीण डाक सेवक की नियुक्ति होगी

  • ग्रामीण डाक सेवा के आश्रितों को 3 महीने के भीतर अनुकंपा का लाभ मिलेगा
  • जरूरी हुआ तो आवेदक की ऊपरी उम्र की सीमा में भी छूट दी जाएगी
नई दिल्ली : डाक विभाग ने मौजूदा नियम के तहत ग्रामीण डाक सेवक के आश्रित परिजनों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने के लिए नई शुरुआत की है। ग्रामीण डाक सेवक की नौकरी के दौरान मौत होने पर आश्रित को बिना किसी मुश्किल के तय समय के भीतर अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने की प्रक्रिया शुरू की गई है। किसी भी ग्रामीण डाक सेवक की नौकरी के दौरान बीमारी या किसी दूसरी वजह से मृत्यु होती है, तो उसके परिवार के सदस्य को अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिलेगी। जरूरी हुआ तो आवेदक की ऊपरी उम्र की सीमा में भी छूट दी जाएगी। नई योजना की शुरुआत से ग्रामीण डाक सेवक जो कि समाज के कमजोर और गरीब तबके से आते हैं और किसी अनहोनी की स्थिति में जिनपर अचानक मुश्किल आ जाती है, उनके परिजनों को राहत मिलेगी। आश्रितों के निकटतम रिश्तेदारों में भी विस्तार दिया गया है, जिसमें अब निम्नलिखित भी शामिल होंगे :
  • शादीशुदा बेटा जो मां-पिता के साथ रह रहा है और ग्रामीण डाक सेवक के निधन के समय अपनी आजीविका के लिए पिता पर पूरी तरह निर्भर हो
  • तलाकशुदा बेटी जो ग्रामीण डाक सेवक के निधन के समय अपने पिता पर ही पूरी तरह से निर्भर हो
  • ग्रामीण डाक सेवक की बहू जो निधन के समय उन्हीं पर पूरी तरह से निर्भर हो और ग्रामीण डाक सेवक के एकमात्र बेटे का पहले ही निधन हो चुका हो
  • परिवार के सदस्यों में इसके विस्तार का लक्ष्य हमारे समाज में महिलाओं के सामने उनके पति/परिजन के अचानक निधन से पैदा हुई मुश्किल परिस्थितियों में राहत देना है
अलग सेवा शर्त, सामाजिक और वित्तीय हालात और परिवार में वित्तीय अभाव, ज्यादा समय लेने वाली जटिल प्रक्रिया की वजह से गरीबी के आधार पर परिजनों के मूल्यांकन के पुराने तरीके को बदलकर वर्तमान तरीका लागू किया गया है। आगे से अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए आए आवेदन पर विचार कर आवेदन प्राप्ति की तारीख से तीन महीने के भीतर इसपर फैसला ले लिया जाएगा। आश्रित को दूर ना जाना पड़े, इसके लिए फैसला किया गया है कि ग्रामीण डाक सेवक के आश्रित को अनुकंपा के आधार पर ग्रामीण डाक सेवक की नियुक्ति वहीं करने की कोशिश की जाएगी, जहां उसका परिवार रहता है।
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आंध्र प्रदेश में भारत की पहली ग्रामीण एलईडी स्ट्रीट लाइटिंग परियोजना क्रियान्वित होगी

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : विद्युत मंत्रालय के अधीनस्थ एनर्जी एफिसिएंसी सर्विसेज लिमिटेड के माध्यम से भारत सरकार आंध्र प्रदेश के सात जिलों की ग्राम पंचायतों में 10 लाख परंपरागत स्ट्रीट लाइट के स्थान पर एलईडी लाइट लगायेगी। यह भारत सरकार की स्ट्रीट लाइटिंग राष्ट्रीय परियोजना (एसएलएनपी) के तहत देश में ग्रामीण एलईडी स्ट्रीट लाइटिंग से जुड़ी पहली परियोजना है। प्रथम चरण में गुंटूर, प्रकाशम, नेल्लोर, कुरनूल, कडप्पा, अनंतपुर और चित्तूर जिलों की ग्राम पंचायतों में यह बदलाव सुनिश्चित किया जायेगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में इस बदलाव अभियान से ग्राम पंचायतों को हर साल कुल मिलाकर लगभग 147 मिलियन यूनिट बिजली की बचत करने में मदद मिलेगी और इससे 12 करोड़ टन कार्बन डाई ऑक्साइड (सीओ2) की रोकथाम संभव हो पायेगी। इस परियोजना पर आने वाली कुल पूंजीगत लागत का वित्त पोषण फ्रांकेइसे डे डेवलपमेंट (एएफडी) नामक फ्रांसीसी विकास एजेंसी द्वारा किया जायेगा। इस परियोजना के तहत ईईएसएल अगले 10 वर्षों तक इन ग्राम पंचायतों में समस्त वार्षिक रख-रखाव और वारंटी प्रतिस्थापन का कार्य करेगी।
इससे पहले आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा था कि वर्ष 2018 तक राज्य के समस्त गांवों में लगभग 30 लाख परंपरागत स्ट्रीट लाइट के स्थान पर एलईडी स्ट्रीट लाइट्स लगाई जायेंगी। ईईएसएल ने राज्य सरकार को आश्वासन दिया है कि 10 लाख एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाने से बिजली में लगभग 59 प्रतिशत की बचत होगी, जो 88.2 करोड़ रुपये की वार्षिक मौद्रिक बचत के बराबर है। राष्ट्रीय स्तर पर भारत के 21 राज्यों में 23 लाख से भी ज्यादा परंपरागत स्ट्रीट लाइट के स्थान पर एलईडी स्ट्रीट लाइट्स लगाई गई हैं।

ग्रामीण विकास में प्रभावी पहल के लिए 144 पुरस्कृत

नई दिल्ली : ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 19 जून, 2017 को एक पुरस्कार समारोह आयोजित किया। इस कार्यक्रम में ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित विभिन्न कार्यक्रमों के अंतर्गत उपलब्धियां दर्शायी गईं। इस समारोह में विभिन्न योजनाओं के अधीन प्रंशसनीय कार्य करने वाले राज्यों, संस्थानों तथा सरकारी पदाधिकारियों को पुरस्कृत किया गया। जियो-मनरेगा के तहत जल संरक्षण पर लघु फिल्म, मध्य प्रदेश की सौ वर्षीय जनजातीय महिला, जदिया बाई के प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत मकान निर्माण तथा पीएमजीएसवाई पर शान द्वारा गाए गए एक दृश्य श्रव्य गीत का भी प्रदर्शन किया गया। ग्रामीण विकास मंत्री ने मनरेगा पर एक नागरिक केंद्रित मोबाइल ऐप की भी शुरूआत की, जिसमें मनरेगा के विभिन्न पहलुओं पर सूचना प्रदान की जा सकती है। ग्रामीण विकास विभाग अपने कार्यक्रम प्रबंधन में सूचना और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का गहन उपयोग करता है और ‘जन-मनरेगा’ ऐप ‘मेरी सड़क’ और ‘आवास’ मोबाइल ऐप विभाग की तीसरी ऐसी नागरिक केंद्रित पहल है।
विभिन्न कार्यक्रमों के अंर्तगत कुल 144 पुरस्कार दिए गए। सतत आजीविका, पारदर्शिता और जवाबदेही, आधार सीडिंग, रूपांतरण और जियो-मनरेगा पर पुरस्कार मनरेगा के तहत दिए गए थे। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंर्तगत सर्वाधिक ग्रामीण सड़कों के निर्माण वाले (बिहार) तथा गैर-परम्परागत निर्माण सामग्री का उपयोग करने वाले (मध्य प्रदेश) राज्यों को पुरस्कार दिए गए। हरियाणा, गुजरात तथा कर्नाटक ने पीएमजीएसवाई (चरण 1 और 2) में लक्ष्य का 95 प्रतिशत से अधिक काम पूरा करने पर विशेष पुरस्कार प्राप्त किए। ऐसे राज्यों को जिन्होंने विभिन्न मापदंड़ों से अच्छा काम किया था, उन्हें पीएमएवाई-जी के अंर्तगत पुरस्कृत किया गया। केंद्रीय भवन अनुसंधान, रुड़की जिसने भवन टाइपोलाजी का तकनीकी परीक्षण उपलब्ध करवाया, ग्रामीण विकास की एनआईसी विभागीय टीम द्वारा तकनीकी सहायता दिए जाने तथा नवीन प्रौद्योगिकियों के उपयोग में महत्वपूर्ण योगदान के लिए यूएनडीपी के सलाहकार, वरिष्ठ नागरिक डॉ. प्रबीर कुमार दास को भी पुरस्कार दिए गए। नौ जिलों के कलैक्टरों को भी अधिकतम संख्या में पीएमएवाई-जी मकान पूरे करने के लिए पुरस्कृत किया गया। महत्वपूर्ण बात यह रही कि नौ जिला कलैक्टरों में से पांच उड़ीसा से थे।

उत्तराखंड व हरियाणा खुले में शौच मुक्त राज्य घोषित

नई दिल्ली : स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के अंतर्गत उत्तराखंड और हरियाणा ने खुद को देश का चैथा और पांचवां खुले में शौच मुक्त राज्य घोषित किया है। ये दोनों राज्य सिक्किम, हिमाचल प्रदेश और केरल की श्रेणी में शामिल हो गए हैं, जो पहले ही खुले में शौच मुक्त राज्य घोषित हो चुके हैं। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण शुरू होने के ढाई महीने के भीतर ही राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छता का दायरा 42 प्रतिशत से बढ़कर 64 प्रतिशत हो गया है। उत्तराखंड में 13 जिले, 95 ब्लॉक, 7256 ग्राम पंचायतें और 15751 गांव हैं, जबकि हरियाणा में 21 जिले, 124 ब्लॉक और 6083 ग्राम पंचायतें हैं। इन सभी ने क्रमशः देहरादून और चंडीगढ़ में खुद को खुले में शौच मुक्त घोषित किया।
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शेष बचे 4141 गांवों का 2018 तक विद्युतीकरण

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : केंद्रीय बिजली, कोयला, नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा एवं खनन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पीयूष गोयल ने राज्य बिजली मंत्रियों के दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि “बिजली ही वह आधार है, जिसके आसपास भारत के प्रत्येक नागरिक को बेहतर जीवन स्तर प्रदान करने के लिए एक उपयुक्त प्रणाली का निर्माण किया जा सकता है”। पीयूष गोयल ने कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य पिछले छः महीनों के दौरान राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा बिजली, कोयला, नवीकरणीय ऊर्जा तथा खनन क्षेत्रों में किए गए कार्यों की समीक्षा करना है। श्री गोयल ने कहा कि इसके अतिरिक्त इस सम्मेलन का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “न्यू इंडिया” के विजन को ध्यान में रखते हुए निर्धारित समय में सभी के लिए 24 घंटे गुणत्तापूर्ण एवं किफायती बिजली उपलब्ध कराने के लक्ष्यों को अर्जित करने के लिए नई नीतियों का निर्माण करना भी है।  
मंत्री महोदय ने कहा कि यह सम्मेलन एक “परिणाम केंद्रित बैठक” है। उन्होंने वड़ोदरा में आयोजित पिछले राज्य बिजली मंत्रियों के सम्मेलन में दिसंबर, 2018 तक देश के प्रत्येक परिवारों को बिजली उपलब्ध कराने के संकल्प को भी दोहराया। उन्होंने यह भी कहा कि सभी के लिए 24 घंटे गुणवत्तापूर्ण एवं किफायती बिजली उपलब्ध कराने के मार्ग की चुनौतियां अभी तक समाप्त नहीं हुई है और अगले तीन चार महीनों में शेष बचे 4141 गांवों का विद्युतीकरण करने के लिए अंतिम रूप से प्रयास करने की आवश्यकता है।
श्री गोयल ने पारदर्शिता और जवाबदेही की चर्चा करते हुए कहा कि भारत के ऊर्जा क्षेत्र में कई मोबाइल ऐप और वेबपोर्टलों का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता इस सरकार की एक पहचान है। मंत्री महोदय ने उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों को राज्य तथा केंद्र सरकार के एक सामूहिक, समन्वयात्मक एवं सहयोगात्मक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने को प्रोत्साहित किया, जो कि देश में एक भ्रष्टाचार मुक्त बिजली क्षेत्र के निर्माण में सहायक होगा। इस सम्मेलन में 23 राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्रियों एवं वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने भाग लिया। इस अवसर पर बिजली सचिव पी. के. पुजारी, खनन सचिव अरुण कुमार, नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा सचिव राजीव कपूर समेत मंत्रालय तथा मंत्रालय के तहत सीपीएसयू के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

15 मई तक 13,469 गांवों का बिजलीकरण हुआ

नई दिल्ली : पंडित दीन दयाल उपाध्याय के अंत्योदय (अंतिम व्यक्ति की सेवा) दर्शन के अनुरूप 20 नवबंर, 2014 को भारत सरकार ने दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजीजेवाई) को स्वीकृति दी। यह एकीकृत योजना है, जिसमें ग्रामीण बिजली वितरण के सभी पक्ष यानी फीडर का अलगाव, प्रणाली सुदृढीकरण तथा मीटरिंग शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त, 2015 को स्वतंतत्रा दिवस के अवसर पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए 1000 दिनों के अंदर बिजली से वंचित सभी गांव को बिजली प्रदान करने का संकल्प व्यक्त किया था। इसलिए, भारत सरकार ने ग्रामीण बिजलीकरण कार्यक्रम को मिशन मोड में लिया और मई, 2018 तक बिजलीकरण का काम पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया।
15 मई, 2017 तक बिजली सुविधा से वंचित 18,452 गांव में से 13,469 गांव में बिजली पहुंचा दी गयी है। पूर्ववर्ती योजना के शेष ग्रामीण बिजलीकरण कार्य डीडीयूजीजेवाई में समाहित किये गये हैं। योजना की परिव्यय राशि 43,033 करोड़ रुपये है। इसमें 3345 करोड़ रुपये भारत सरकार का अनुदान है। पुराने ग्रामीण कार्य को समाहित करने के साथ समग्र परिव्यय राशि भारत सरकार की अनुदान राशि 63,027 करोड़ रुपये सहित 75,893 करोड़ रुपये है।
नई डीडीयूजीजेवाई योजना के अंतर्गत परियोजना लागत की 60 प्रतिशत (विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए 85 प्रतिशत) की दर से भारत सरकार अनुदान देती है। निर्धारित मानदंडों को पूरा करने पर 15 प्रतिशत की दर से अतिरिक्त अनुदान (विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए 5 प्रतिशत) दिया जाता है। इस योजना के अंतर्गत 32 राज्यों / केन्द्र शासित प्रदेशों के लिए 42,553.17 करोड़ रुपये की परियोजनाएं मंजूर की गयी हैं। इनमें फीडर अलगाव के लिए (15572.99 करोड़ रुपये), प्रणाली सुदृढीकरण तथा ग्रामीण घरों से जोड़ने के लिए (19706.59 करोड़ रुपये), मीटरिंग (3874.48 करोड़ रुपये), ग्रामीण बिजलीकरण (2792.57 करोड़ रुपये) तथा सांसद आदर्श ग्राम योजना (398.54 करोड़ रुपये) शामिल है।
ग्रामीण बिजलीकरण कार्य की प्रगति की निगरानी के लिए फील्ड में 350 से अधिक ग्राम विद्युत अभियंता (जीवीए) तैनात किये गये हैं। बिजली सुविधा से वंचित 18,452 गांवों में बिजलीकरण की प्रगति की निगरानी के लिए जीएआरवी मोबाइल एप विकसित किया गया। जीएआरवी एप में जीवीए फील्ड फोटोग्राफ, डाटा तथा अन्य सूचना अपडेट करते हैं। सभी 5.97 लाख गांवों में घरों के बिजलीकरण की निगरानी के लिए 20 दिसंबर, 2016 को अद्यतन जीएआरवी एप को लांच किया गया। अद्यतन जीएआरवी में संवाद-पारदर्शिता और दायित्त स्थापित करने में नागरिकों को शामिल करने का विशेष फीचर है। योजना से ग्रामीणों की जीवनशैली बदलने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में समग्र सामाजिक आर्थिक विकास होने की आशा है। योजना के निम्नलिखित महत्वपूर्ण परिणाम हैं :
  • कृषि में उत्पादकता वृद्धि
  • महिलाओं के लिए निरसता कम करना
  • बच्चों की शिक्षा में सुधार
  •  सभी गांवों तथा घरों से संपर्क
  • ग्रामीण क्षेत्रों में विश्वसनीय बिजली सेवा
  • स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाएं देने में सुधार
  • संचार साधनों (रेडियो, टेलीफोन, टेलीविजन, मोबाइल) तक पहुंच में सुधार
  • बिजली व्यवस्था से जनसुरक्षा में सुधार।
योजना में राज्यों की स्थानीय आवश्यकता/प्राथमिकता के अनुसार कार्य चुनने में लचीलापन है। जनसंख्या मानक को समाप्त कर दिया है और जनसंख्या प्रतिबंध के बिना सभी गांवों व मोहल्लों को योजना के अंतर्गत पात्र माना गया है। डीपीआर तैयार करते समय राज्य जिला बिजली समिति (बीईसी) से परामर्श करेंगे और योजना में सांसदों के सांसद आदर्श ग्राम योजना (एसएजीवाई) के प्रस्तावों को आवश्यक रूप से शामिल करना होगा। योजना की अन्य विशेषताओं में अनिवार्य ई-निविदा, मानक निविदा दस्तावेज का परिपालन शामिल है। निजि बिजली वितरण कंपनियां तथा आरई को-आॅपरेटिव सोसाइटी भी योजना के अंतर्गत पात्र हैं। योजना की समीक्षा दिशा (जिला विकास समन्वय तथा निगरानी समिति) द्वारा की जा रही है। भारत सरकार ग्रामीण जनता की जिंदगी में परिवर्तन लाने और सभी के लिए 24 घंटे बिजली देने के लिए संकल्पबद्ध है।
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रविवार, 23 अप्रैल 2017

नव काव्यांजलि एक निर्भीक अभिव्यक्ति

समीक्षक : बसंत कुमार राय
 पुस्तक समीक्षा 
राजीव मणि द्वारा संपादित ‘नव-काव्यांजलि’ में ‘अपनी बात’ कहते हुए संपादक की यह उक्ति अच्छी लगी कि संग्रह में मौजूद गलतियों की जवाबदेही उन पर है, लेकिन खूबियों का श्रेय कवियों को जाता है। प्रश्न उठता है कि किस प्रकार की गलतियों के लिए वे दायित्व ले रहे हैं? क्या इनमें रचनागत त्रुटियाँ भी शामिल है? यदि हाँ, तो कमियों के बचाव के लिए उनका पक्ष अनूठा है।
किसी भी कविता में कविता इस बात पर निर्भर करती है कि कवि वस्तु को किस तरह देखता है, क्योंकि वस्तु की भौतिक सत्ता कविता में गौण हो जाती है। ऐसे में कवि अपनी अंतर्दृष्टि के सहारे उसे संरचनागत विस्तार देता है। यहीं वह प्रस्थान बिंदु भी है, जहाँ से कवि अपनी निजता का अतिक्रमण भी करता चलता है। वस्तु की सर्वस्वीकार्यता प्रस्तुत करने की यह प्रक्रिया कवि की अवलोकन क्षमता, संवेदना की गहराई, रचने के लिए शिल्प के चुनाव के विवके पर बहुत ज्यादा निर्भर करती है। यहाँ रचना के अबूझ बन जाने का खतरा रहता है, जिससे आधुनिक कविता बुरी तरह पीड़ित है, लेकिन पाठक रचना को छोड़ रचनाकार (कवि) का नाम देखकर वाह-वाह कर देते हैं।
Nav Kavyanjali
ऐसा भी होता है कि वस्तु का विन्यासगत विस्तार करते-करते कवि स्थूल विवरणों के सहारे अपने कत्र्तव्य की इतिश्री समझ लेता है। तब कविता निश्प्राण हो जाती है। यह एक बड़ी कमजोरी है, जिसको देखते हुए प्रकाशक कविता की पुस्तक छापने से घबराते हैं। यह संग्रह इस कमजोरी से मुक्त नहीं है, लेकिन संपादक कुछ अच्छी रचनाओं को सामने रखकर ‘नव काव्यांजलि’ प्रकाशित करने के लिए निश्चितरूपेण प्रशंसा के पात्र हैं। 
संग्रह की कुछ कविताओं में जीवन का मर्म, उसकी पेंददगियां, उसमें निहित प्रेम और करूणा, ईष्र्या-द्वेष, आशा-आकांक्षा, भ्रम और छल, संघर्ष, हिंसा और प्रतिहिंसा का विद्रूप खुलकर सामने आया है। दरअसल में काव्य रचना की चारित्रिक खूबियां हैं कि वह अपनी बनावट में लोकतांत्रिक हैं। राजनीतिक लोकतंत्र की अवधारणा से परे रचनागत लोकतांत्रिकता कविता की विशिष्ट पहचना है। यह तब भी कविता में थी, जब धरती पर लोकतंत्र नहीं था। कुम्भन दास की यह उक्ति-भक्तन को कहां सीकरी सो काम, स्वयं में एक पुख्ता प्रमाण है। ऐसे तो भक्ति आंदोलन का सूत्रपात ही लोकोन्मुखी प्रवृत्तियों के कारण लोकभाषाओं में हुआ। इसलिए न्यायसंगत मान्यता के तहत कविता संपूर्ण चराचर की निर्भीक अभिव्यक्ति है। मुझे खुशी हुई कि इस संग्रह में ज्यादातर कवियों की चिन्ता में आमजन सहित नदी, पेड, चिड़ियाँ, पहाड़ आदि शामिल हैं। 
सृष्टि का स्वरूप ही काव्यमय है। कोई भी कविता इस सत्य के अनुरूप ही शलाध्य हो सकती है। कहना न होगा कि मनुष्य ने काव्यमयता को बिगाड़ने की भरपूर कोशिश की है। यह कोशिश लगातार जारी है। कविता ऐसी कोशिश के खिलाफ किस तरह खड़ी है, यह उसकी सबसे बड़ी चुनौती है। संग्रहित कवियों से यह उम्मीद की जाती है कि इस आसन्न चुनौती से वे मुंह न मोड़ेंगें।
समीक्षक : बसंत कुमार राय

सरकार हज यात्रियों को पानी के जहाज से पुनः सऊदी अरब के जेद्दा शहर भेजने के विकल्प पर विचार कर रही

नई पॉलिसी का उद्देश्य हज प्रक्रिया को आसान व पारदर्शी बनाना : नकवी 

नई दिल्ली : केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं संसदीय कार्य राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि आने वाले दिनों में समुद्री मार्ग से हज यात्रा दोबारा शुरू कराने हेतु सक्रिय विचार चल रहा है और इस सम्बन्ध में पोत परिवहन मंत्रालय से बातचीत की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। श्री नकवी ने यह बात मुंबई में हज हाउस में हज 2017 के सम्बन्ध में आयोजित किये जा रहे एक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कही। श्री नकवी ने कहा कि हज नीति 2018 तय करने के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति यात्रियों को पानी के जहाज से पुनः सऊदी अरब के जेद्दा शहर भेजने के विकल्प पर सक्रिय विचार कर रही है। 
श्री नकवी ने कहा कि सरकार समुद्री मार्ग सहित सभी विकल्पों पर गौर कर रही है। अगर चीजें तय होती हैं, तो यह एक क्रांतिकारी और हजयात्रियों के हित में फैसला होगा। हजयात्रियों के मुंबई से समुद्री मार्ग के जरिये जेद्दा जाने का सिलसिला 1995 में रुक गया था। 
हज यात्रियों को जहाज (समुद्री मार्ग) से भेजने पर यात्रा संबंधी खर्च करीब आधा हो जाएगा। मौजूदा समय में मुंबई और दिल्ली सहित 21 स्थानों से हज की उड़ानें जेद्दा के लिए जाती हैं। नई तकनीक एवं सुविधाओं से युक्त पानी का जहाज एक समय में चार से पांच हजार लोगों को ले जाने में सक्षम हैं। मुंबई और जेद्दा के बीच 2,300 नॉटिकल मील की एक ओर की दूरी सिर्फ दो-तीन दिनों में पूरी कर सकते हैं। जबकि पहले पुराने जहाज से 12 से 15 दिन लगते थे। 
श्री नकवी ने कहा कि उच्च स्तरीय कमेटी अपनी रिपोर्ट जल्द ही सौंप देगी। नई हज पालिसी का उद्देश्य हज की संपूर्ण प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना है। इस नई पालिसी में हज यात्रियों के लिए विभिन्न सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जायेगा। श्री नकवी ने कहा कि इस बार अल्पसंख्यक मंत्रालय ने सम्बंधित एजेंसियों के साथ मिल कर हज 2017 की तैयारी बहुत पहले से शुरू कर दी थी। अल्पसंख्यक मंत्रालय का उद्देश्य है कि हज यात्रा के दौरान हाजियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलें। श्री नकवी ने कहा कि हज 2017 आवेदन की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने के जबरदस्त नतीजे सामने आये हैं। इस वर्ष कुल प्राप्त आवेदनों में 1,29,196 ऑनलाइन आवेदन किये गए, जो ‘डिजिटल इंडिया’ की ओर भारत के बढ़ते कदम का उदाहरण हैं। 
श्री नकवी ने कहा कि सऊदी अरब द्वारा भारत से वार्षिक हज पर जाने वाले यात्रियों के कोटे में बढ़ोतरी किये जाने का लगभग सभी राज्यों को फायदा हुआ है। और राज्यों से इस वर्ष जाने वाले हज यात्रियों के कोटे में बड़ी बढ़ोतरी कर दी गयी है। सऊदी अरब ने 2017 के लिए भारत के वार्षिक हज कोटे में 34,005 की वृद्धि कर दी है। इस सम्बन्ध में इस वर्ष 11 जनवरी को सऊदी अरब के जिद्दा में द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किये गए थे। वर्षों बाद भारत से हज पर जाने वाले यात्रियों के कोटे में इतनी बड़ी वृद्धि की गई है। हज 2016 में भारत भर में 21 केंद्रों से लगभग 99,903 हाजियों ने हज कमेटी ऑफ इंडिया के जरिये हज किया और लगभग 36 हजार हाजियों ने प्राइवेट टूर ऑपरेटरों के जरिये हज की अदायगी की थी। 
हज 2017 के लिए सऊदी अरब द्वारा कोटे में की गई वृद्धि के बाद हज कमेटी ऑफ इंडिया के माध्यम से 1,25,025 हाजी हज यात्रा पर जायेंगे। जबकि 45,000 हज यात्री प्राइवेट टूर ऑपरेटरों के माध्यम से हज पर जायेंगे। इस तरह इस वर्ष कुल 1,70,025 हज यात्री भारत से हज यात्रा पर जायेंगे।
तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में हज 2017 के लिए चुने गए प्रशिक्षकों को हज कमिटी ऑफ इंडिया, मुंबई में किंगडम ऑफ सऊदी अरब के रॉयल कांसुलेट, मुंबई नगर पालिका, सऊदी एयरलाइन्स, एयर इंडिया, कस्टम्स, आप्रवासन के अधिकारियों एवं डॉक्टरों ने हज यात्रा के दौरान ‘क्या करें, क्या ना करें’ की जानकारी दी। इसमें यातायात, जेद्दा में आवास, सऊदी अरब के कानूनों की जानकारी शामिल थी। इस कार्यक्रम में 500 से अधिक प्रशिक्षकों ने भाग लिया। ये प्रशिक्षक देश भर में ट्रेनिंग कैंप लगाकर हाजियों को प्रशिक्षण देंगे।
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एक करोड़ मनरेगा परिसंपत्तियां भू-चिन्हित

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : इसके अंतर्गत हर वर्ष औसतन करीब 30 लाख परिसंपत्तियों का निर्माण किया जाता है, जिनमें अनेक कार्य शामिल होते हैं, जैसे जल संरक्षण ढांचों का निर्माण, वृक्षारोपण, ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का सृजन, बाढ़ नियंत्रण के उपाय, स्थायी आजीविका के लिए व्यक्तिगत परिसंपत्तियों का निर्माण, सामुदायिक ढांचा और ऐसी ही अन्य परिसंपत्तियां शामिल होती हैं। मनरेगा परिसंपत्तियों को भू-चिन्हित यानी जिआ-टैग करने की प्रक्रिया जारी है और इस कार्यक्रम के अंतर्गत सृजित सभी परिसंपत्तियां जिआ-टैग की जाएंगी। राष्ट्रीय प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन कार्यों, विशेष रूप से जल संबंधी कार्यों को भू-चिन्हित यानी जिआ-टैग करने पर विशेष ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है। 
जिआ-मनरेगा ग्रामीण विकास मंत्रालय का एक बेजोड़ प्रयास है, जिसे राष्ट्रीय दूर संवेदी केन्द्र (एनआरएससी), इसरो और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र के सहयोग से अंजाम दिया जा रहा है। इसके लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 24 जून, 2016 को एनआरएससी के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। इसके अंतर्गत प्रत्येक ग्राम पंचायत के अंतर्गत सृजित परिसंपत्तियों को जिओ-टैग किया जाना है। इस समझौते के फलस्वरूप राष्ट्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज संस्थान की सहायता से देशभर में 2.76 लाख कर्मिकों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उम्मीद की जा रही है कि भू-चिन्हित करने की प्रकिया से फीड स्तर पर जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी।

छात्रों को डॉ. अम्बेडकर राष्ट्रीय प्रतिभा पुरस्कार 

नई दिल्ली : माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालय परीक्षा 2016 के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के प्रतिभाशाली छात्रों को एक समारोह में डॉ. अम्बेडकर राष्ट्रीय प्रतिभा पुरस्कार प्रदान किए गए। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, विजय सांपला और रामदास अठावले ने 2016 की 10वीं और 12वीं की परीक्षा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने वाले अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के प्रतिभाशाली छात्रों को पुरस्कार प्रदान किए। इस अवसर पर ‘कलेक्टेड वर्क्स ऑफ बाबासाहेब अम्बेडकर’ का नया मुद्रित संस्करण और ऑडियो सीडी का एक सेट भी जारी किया गया। समारोह का आयोजन सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधीन डॉ. अम्बेडकर फाउंडेशन ने किया था।
पुरस्कारों को 2 वर्गों में वितरित किया गया। पहले वर्ग में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के वे छात्र शामिल थे, जिन्होंने 2016 की माध्यमिक विद्यालय परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया। चूंकि पहली, दूसरी और तीसरी श्रेणी में कोई छात्रा नहीं है, इसलिए सबसे अधिक अंक प्राप्त करने वाली छात्रा के लिए विशेष पुरस्कार की घोषणा की गई, ताकि कन्या शिक्षा को प्रोत्साहित किया जा सके। पुरस्कार के दूसरे वर्ग में उच्च माध्यमिक विद्यालय परीक्षा 2016 में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने वाले अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों को पुरस्कृत किया गया। 10वीं कक्षा में कुल 79 छात्रों को और 12वीं कक्षा में कुल 105 छात्रों को पुरस्कार दिये गए। प्रथम पुरस्कार में 60 हजार रुपये, दूसरे पुरस्कार में 50 हजार रुपये और तीसरे पुरस्कार में 40 हजार रुपये का नकद पुरस्कार है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री एवं डॉ. अम्बेडकर फाउंडेशन के अध्यक्ष थावर चंद गहलोत ने अपने संदेश में कहा कि शिक्षा बहुत शक्तिशाली उपकरण है और हर छात्र की उस तक पहुंच होनी चाहिए। उन्होंने छात्रों का आह्वान किया कि वे पढ़ाई में खुद को समर्पित कर दें, ताकि समाज और राष्ट्र का लाभ हो। उन्होंने छात्रों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। विजय सांपला ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. अम्बेडकर ने अनुसूचित जातियों की उन्नति के लिए बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और वे ज्ञान के प्रतीक थे। हमें उनके जीवन से जीने की शैली सीखनी चाहिए।
रामदास अठावले ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर ने हमें गौरव के साथ जीना सिखाया और वे हम सबके प्रेरणास्रोत थे। उनका मानना था कि हमारी उन्नति के लिए शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। उनका कहना था कि छात्रों को केवल रोजगार प्राप्त करने पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि उन्हें स्वयं अपना उपक्रम शुरु करना चाहिए। इस संबंध में अनुसूचित जातियों की सहायता के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की वेंचर कैपिटल फंड की योजना मौजूद है।
इस अवसर पर कृष्णपाल गुर्जर ने प्रतिभाशाली छात्रों को बधाई दी और कहा वे देश के भविष्य हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान का विषय है कि इन पुरस्कारों को डॉ. भीम राव अम्बेडकर के नाम पर दिया जाता है, जिन्होंने समानता के लिए संघर्ष किया था। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने डॉ. अम्बेडकर से जुड़े पांच स्थानों को ‘पंचतीर्थ’ के रूप में घोषित किया है। उन्होंने छात्रों का आह्वान किया कि वे अपना लक्ष्य स्वयं निर्धारित करें और उसे प्राप्त करने का प्रयास करें।  

3.54 करोड़ विद्यार्थियों को 14 छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ 

नई दिल्ली : अनुसूचित जातियों और अन्य पिछड़े वर्गों (अपिव) विमुक्त, घुमंतु और अर्द्ध-घुमंतु जातियों के विद्यार्थियों के लिए 14 स्कालरशिप योजनाएं डिजिटल भुगतान के अंतर्गत संचालित की जा रही हैं, जिनका लाभ 3.54 करोड़ विद्यार्थियों को मिल रहा है। छात्रवृत्ति की समस्त राशि विद्यार्थियों के बैंक खातों में अंतरित की जा रही है और अजा. विद्यार्थियों के 60 प्रतिशत बैंक खाते आधार से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि छात्रवृत्तियों, विद्यार्थियों के लिए छात्रावासों, प्रशिक्षण सुविधाओं, परिसरों, संस्थानों के निर्माण / उन्नयन के लिए पूंजी प्रदान करने आदि उपायों के जरिए अनुसूचित जातियों से सम्बद्ध विद्यार्थियों का शैक्षिक सशक्तिकरण किया जा रहा है। यह जानकारी केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने “प्रमुख सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों” के बारे में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में दी। 
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय अलग-अलग तरह की सात छात्रवृत्तियां कार्यान्वित करता है, जिनमें मैट्रिक-परवर्ती और मैट्रिक-पूर्ववर्ती छात्रवृत्तियां, टॉप क्लास स्कालरशिप, राष्ट्रीय विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति, अनुसूचित जातियों के लिए यूजीसी द्वारा संचालित राष्ट्रीय फेलोशिप, अस्वच्छ व्यवसायों में लगे व्यक्तियों के बच्चों के लिए प्री-मैट्रिक स्कालरशिप, अनुसूचित जातियों और अपिव के लिए निशुल्क कोचिंग (70: 30 अनुपात में) और योग्यता उन्नयन छात्रवृत्तियां शामिल हैं। भारत सरकार का यह विश्वास है कि सब के लिए शिक्षा सशक्तिकरण की कुंजी है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय अपने बजट का करीब 54 प्रतिशत अनुसूचित जातियों के लिए छात्रवृत्तियों पर खर्च करता है। 
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की प्रत्येक शाखा को वित्त मंत्रालय द्वारा एक उद्यमी के रूप में कम से कम एक अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के युवक की सहायता करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे कि उनके बीच अधिक रोजगार का सृजन किया जा सके। 

सरकार ने श्रम कानूनों और नियमों को आसान बनाया 

नई दिल्ली : सरकार ने विभिन्न प्रतिष्ठानों द्वारा श्रम कानूनों और नियमों के परिपालन को सहज बनाने के लिए अभियान शुरू किया है। निश्चित श्रम कानून नियमों 2017 के अंतर्गत फॉर्मों और रिपोर्टों को तर्क संगत बनाने से आवेदनों तथा रिपोर्टों की संख्या 3 अधिनियमों और उनके नियमों के अंतर्गत कम होकर 36 से 12 हो गई है। इस अभियान का उद्देश्य उपायोगकर्ता के लिए फॉर्मों और रिपोर्टों को समझने में सहज बनाना है। इससे प्रयास, लागत में बचत होगी और विभिन्न प्रतिष्ठानों के अनुपालन बोझ में कमी आयेगी। 2013-14 में केन्द्रीय सांख्यकी कार्यालय की छठी आर्थिक गणना के अनुसार, कृषि और गैर-कृषि क्षेत्रों में लगभग 5.85 करोड़ प्रतिष्ठान हैं।
विभिन्न श्रम कानूनों के तहत फॉर्म भरने की आवश्यकता की समीक्षा में पाया गया कि तीन अधिनियमों और उनके अंतर्गत बने कानूनों के 36 फॉर्म अनावश्यक थे। इसलिए श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा परस्पर रूप से जुड़ें फॉर्मों को समाप्त करने और फॉर्मों की संख्या कम करने का अभियान चलाया। 9 फरवरी, 2017 को फॉर्मों तथा रिपोर्टों की संख्या घटाने के आशय की अधिसूचना पब्लिक डोमेन में आई और इस बारे में आपत्तियों और सुझावों को सभी हितधारकों से मांगा गया।
श्रम कानून जिसके अंतर्गत यह फॉर्म भरे जाते हैं, निम्नलिखित हैं :
  • अनुबंध श्रमिक (विनियमन और समाप्ति) अधिनियम, 1970
  • अंतर राज्यीय प्रवासी कर्मी (रोजगार और सेवा शर्तों का विनियमन) अधिनियम, 1979
  • भवन तथा अन्य निर्माण श्रमिक (रोजगार और सेवा शर्तों का विनियमन) अधिनियम, 1996

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सोमवार, 27 मार्च 2017

शहरी गरीबों के लिए अधिक किफायती आवास

  • पुद्दुचेरी के लिए 3,128 और हिमाचल प्रदेश के लिए 2,655 आवास
  • कर्नाटक के लिए 31424 आवास, मध्य प्रदेश-27475, बिहार-25221, झारखंड-20099, केरल-11480 और ओडीशा-2115 आवासों को मंजूरी
  • अबतक किफायती आवासों के लिए एक लाख करोड़ रुपये के निवेश की मंजूरी
नई दिल्ली : आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय ने प्रधानमंत्री आवास योजना-पीएमएवाई (शहरी) के तहत पुद्दुचेरी के शहरी गरीबों के लिए 3128, तेलंगाना के लिए 924 और हिमाचल प्रदेश के लिए 2655 और किफायती आवासों की मंजूरी दी है। 
मंत्रालय ने कल शहरी गरीबों के लिए 1,24,521 किफायती आवासों के लिए मंजूरी दी है। अबतक पीएमएवाई (शहरी) के अंतर्गत मंजूर किए गए 95,671 करोड़ रुपये के निवेश से ऐसे आवासों का निर्माण किया जा रहा है। इन आवासों के निर्माण के लिए केंद्र से 27,766 करोड़ रुपये की सहायता राशि मंजूर की गई है।
शहरी क्षेत्रों में आवासीय मिशन की प्रगति को ध्यान में रखते हुए आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने मंत्रालय के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे सुनिश्चित करें कि शहरी गरीबों के लिए आवासों के निर्माण में संबंधित शहर और राज्य सरकारें कम समय में आवश्यक कदम उठाएं।
पुद्दुचेरी के लिए 47 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता के साथ 131 करोड़ रुपये की कुल परियोजना लागत से पीएमएवाई (शहरी) के लाभार्थी आधारित निर्माण (बीएलसी) के अंतर्गत चार कस्बों में 3,128 आवासों के लिए मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही पुद्दुचेरी के लिए मंजूर किए गए आवासों की कुल संख्या बढ़कर 3,848 हो गई है। पुद्दुचेरी के लिए 2093, कराइकल-592, यनाम-358 और माहे-85 आवास हैं।
तेलंगाना में सिद्दीपेट के लिए 14 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता के साथ कुल लगभग 14 करोड़ रुपये की लागत से बीएलसी के अंतर्गत 924 आवास और निर्मित करने की मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही पीएमएवाई (शहरी) के अंतर्गत राज्य के लिए मंजूर किए गए आवासों की कुल संख्या बढ़कर 81,405 हो गई है।
हिमाचल प्रदेश के 12 कस्बों के लिए 40 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता के साथ 102 करोड़ रुपये की कुल परियोजना लागत से 2655 आवासों के लिए मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही पीएमएवाई (शहरी) के अंतर्गत राज्य के लिए अबतक मंजूर किए गए आवासों की कुल संख्या बढ़कर 4,569 हो गई है। हिमाचल प्रदेश में नालागढ़ के लिए 531, नाहन-289, धर्मशाला-227, ऊना-217, मंडी-174, शिमला-61, चाबा-57, बिलासपुर-37, सोलन-27, बड्डी-25, कुल्लु-9 और परवाना-1 आवास की मंजूरी दी गई है।
पीएमएवाई (शहरी) के बीएलसी के अंतर्गत प्रत्येक लाभार्थी को अपनी भूमि पर पक्का मकान बनाने या मौजूदा मकान में सुधार करने के लिए 1.50 लाख रुपये की केंद्रीय सहायता प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त पीएमएवाई (शहरी) के अंतर्गत कर्नाटक के लिए 31424 आवास, मध्य प्रदेश-27475, बिहार-25221, झारखंड-20099, केरल-11480 और ओडीशा-2115 आवासों को मंजूरी दी गई है। ज्ञात हो कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 25 जून, 2015 को प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) का शुभारंभ किया गया था। इसका उद्देश्य सभी शहरी गरीबों के लिए आवश्यक सुविधा के साथ पक्का मकान उपलब्ध कराना है।
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सभी राज्यों में ‘हुनर हब’ बनाये जायेंगे

  • देश के अल्पसंख्यक समाज के दस्तकारों, शिल्पकारों का डेटा बैंक तैयार किया जा रहा
  • केंद्र सरकार देश भर के एक लाख मदरसों, शिक्षण संस्थानों में शौचालय का निर्माण करेगी
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर के 5 शिक्षण संस्थानों की स्थापना
नई दिल्ली : केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं संसदीय कार्य राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि अल्पसंख्यक समाज के दस्तकारों-शिल्पकारों की कला-कौशल की विरासत को मार्किट-मौका मुहैया कराने के लिए सभी राज्यों में ‘हुनर हब’ बनाये जायेंगे। श्री नकवी ने कहा कि देश भर के अल्पसंख्यक समाज के दस्तकारों, शिल्पकारों का ‘डेटा बैंक’ तैयार किया जा रहा है। नई दिल्ली में आयोजित बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम (एमएसडीपी), छात्रवृत्ति और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं के कार्यान्वयन की प्रगति की समीक्षा करने के लिए राज्यों, संघ राज्य क्षेत्रों के प्रधान सचिवों, अल्पसंख्यक कल्याण प्रभारी, सचिवों के सम्मेलन में श्री नकवी ने यह बात कही।
श्री नकवी ने कहा कि अल्पसंख्यक समाज की पुश्तैनी शिल्पकारी-दस्तकारी को आधुनिक युग की जरुरत के हिसाब से कौशल विकास के जरिये तराशने हेतु बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जा रहा है, जिनमें राजगीर, बढ़ई, जरदोजी, टेलरिंग, हाउस कीपिंग, आधुनिक-आर्गेनिक कृषि, कुम्हार, ज्वेलरी, यूनानी-आयुर्वेद अनुसंधान, ब्रास, कांच, मिट्टी से निर्मित सामग्री का निर्माण शामिल है। श्री नकवी ने कहा कि हुनर हब के संबंध में राज्य अपने प्रस्ताव भेजे, ताकि अगले वित्तीय वर्ष में कम से कम दो दर्जन राज्यों में ऐसे हुनर हब का निर्माण हो सके, जहां हुनर हाट एवं अन्य सामाजिक-शैक्षिक, कौशल विकास की गतिविधियां की जा सके। श्री नकवी ने कहा कि अल्पसंख्यक मंत्रालय द्वारा आयोजित दो हुनर हाट बहुत ही लोकप्रिय साबित हुए हैं। हुनर हाट के माध्यम से अल्पसंख्यक समाज के दस्तकारों, शिल्पकारों को अपनी कला को देश ही नहीं, विदेश के दर्शकों के सामने प्रदर्शित करने का मौका मिला है।   
श्री नकवी ने कहा कि पिछले 6 महीनों में लगभग 262 करोड़ की लागत से 200 से ज्यादा “सद्भाव मंडप” और लगभग 24 “गुरुकुल” प्रकार के आवासीय स्कूलों को स्वीकृति दी गई है। सद्भाव मंडप विभिन्न प्रकार के सामाजिक - शैक्षिक - सांस्कृतिक एवं कौशल विकास की गतिविधियों का संपूर्ण केंद्र होंगे, साथ ही यह किसी आपदा के समय राहत केंद्र के रूप में भी इस्तेमाल किये जा सकेंगे।
श्री नकवी ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन को मजबूती देने के लिए अल्पसंख्यक मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। केंद्र सरकार देश भर के एक लाख मदरसों, शिक्षण संस्थानों में शौचालय का निर्माण करेगी। श्री नकवी ने कहा कि इन शैक्षिक केंद्रों में सरकार की योजना मध्याह्न भोजना योजना और शिक्षकों के लिए अपग्रेड कौशल योजना शुरू करने की भी है, जो कि ‘3-टी’ सूत्र - टीचर, टिफिन और टॉयलेट का हिस्सा है। श्री नकवी ने कहा कि इस योजना की सफलता में राज्यों की बड़ी ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
श्री नकवी ने कहा कि कई वर्षों के बाद अल्पसंख्यक मंत्रालय के बजट में बड़ी वृद्धि की है। 2017-18 के लिए अल्पसंख्यक मंत्रालय का बजट बढ़ाकर 4195.48 करोड़ रुपए कर दिया गया है। यह पिछले बजट के 3827.25 करोड़ रुपए के मुकाबले 368.23 करोड़ रुपए (9.6 प्रतिशत की वृद्धि) अधिक है। श्री नकवी ने कहा कि बजट में बढ़ोतरी से अल्पसंख्यकों के सामाजिक - आर्थिक - शैक्षिक सशक्तिकरण में मदद मिलेगी। श्री नकवी ने कहा कि इस बार बजट का 70 प्रतिशत से ज्यादा धन अल्पसंख्यकों के शैक्षिक सशक्तिकरण एवं कौशल विकास, रोजगारपरक ट्रेनिंग पर खर्च किया जायेगा। बजट का बड़ा भाग विभिन्न स्कालरशिप, फेलोशिप और कौशल विकास की योजनाओं जैसे - सीखो और कमाओ, नई मंजिल, नई रौशनी, उस्ताद, गरीब नवाज कौशल विकास केंद्र, बेगम हजरत महल स्कॉलरशिप पर खर्च किये जाने का प्रावधान है। इसके अलावा बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम (एमएसडीपी) के तहत भी शैक्षिक विकास की गतिविधियों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर धन खर्च किया जायेगा।  
श्री नकवी ने कहा कि अल्पसंख्यक मंत्रालय, अल्पसंख्यकों को बेहतर पारंपरिक एवं आधुनिक शिक्षा मुहैय्या कराने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के 5 शिक्षण संस्थानों की स्थापना कर रहा है। तकनीकी, मेडिकल, आयुर्वेद, यूनानी सहित विश्वस्तरीय कौशल विकास की शिक्षा देने वाले संस्थान देश भर में स्थापित किये जायेंगे। एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है, जो शिक्षण संस्थानों की रुपरेखा-स्थानों आदि के बारे में चर्चा कर रही है और जल्द ही अपनी विस्तृत रिपोर्ट देगी और मंत्रालय की कोशिश होगी कि यह शिक्षण संस्थान 2018 से काम करना शुरू कर दें। इन शिक्षण संस्थानों में 40 प्रतिशत आरक्षण लड़कियों के लिए किये जाने का प्रस्ताव है।
अल्पसंख्यकों के शैक्षिक सशक्तिकरण के लिए किये जा रहे हमारे प्रयासों में गरीब नवाज स्किल डेवलपमेंट सेंटर शुरू करना, छात्राओं के लिए बेगम हजरत महल स्कालरशिप, करना एवं 500 से ज्यादा उच्च शैक्षिक मानकों से भरपूर आवासीय विद्यालय एवं रोजगार परक कौशल विकास केंद्र शामिल हैं। सम्मेलन का उद्देश्य 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान कार्यान्वित अल्पसंख्यक मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं की कार्यक्षमता की समीक्षा करने के साथ-साथ 14वें वित्त आयोग (2017-18 से 2019-20 तक) की शेष अवधि के दौरान कार्यान्वयन के लिए राज्यों के सुझाव प्राप्त करना है।
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