COPYRIGHT © Rajiv Mani, Journalist, Patna

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मंगलवार, 3 मई 2016

‘ए-2 टाइप दूध की परीक्षण प्रणाली शीघ्र विकसित हो’

  • देशी गाय के दूध की अलग से खरीद
  • प्रसंस्करण एवं विपणन करने को प्राथमिकता दी जाय : राधा मोहन सिंह 

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि पैदा होने से बुजुर्ग अवस्था तक दूध मनुष्य के लिए अनिवार्य खाद्य पदार्थ है। दूध एवं दूध के पदार्थं स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैं। विश्व भर में लोगों की प्रोटीन की 13 प्रतिशत आवश्यकता दूध व दुग्ध उत्पादों से ही पूरी होती है। सदियों से दूध को अच्छे स्वास्थ्य के लिए अमृत माना गया है। पिछले कुछ वर्षों से उपभोक्ताओं के बीच ए-1 एवं ए-2 दूध चर्चा का विषय बना हुआ है। श्री सिंह ने कहा कि वर्तमान में शोध से पाया गया है कि ए-2 टाइप दूध ए-1 टाइप दूध से कई गुणा ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक है। देसी नस्ल की गायों में ए-2 टाइप दूध प्रोटीन प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। ये कई बीमारियों जैसे कि हृदय रोग, डायबिटिज एवं न्यूरोलॉजीकल डिसऑर्डर से बचाता है एवं शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता पैदा करता है। 
इस विषय पर चर्चा करते हुए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने बैठक में निर्देश दिये कि देशी गाय के दूध की अलग से खरीद, प्रसंस्करण एवं विपणन करने को प्राथमिकता दी जाय। साथ ही इस दूध को प्रीमियम (उच्चतर) कीमत मिलनी चाहिए। इससे न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सुधार होगा बल्कि हमारी देसी गाय का संरक्षण एवं विकास भी होगा। मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ए-2 टाइप दूध के परीक्षण के लिए सरल, सस्ती एवं त्वरित प्रणाली विकसित की जाय, जो कि किसान के द्वार पर उपलब्ध हो सके। कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार की योजनाओं को इस तरह संशोधित किया जाए कि देशी गाय के दूध के प्रसंस्करण एवं विपणन के लिए डेयरी यूनिट व मिल्क प्लांट की स्थापना को प्रोत्साहित किया जाय। बैठक में पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य पालन विभाग, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड व डेयरी उद्योग के वरिष्ठ अधिकारी एवं वैज्ञानिक उपस्थित थे।

होम्योपैथी केन्द्रीय परिषद अधिनियम, 1973 में संशोधन 

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने होम्योपैथी केन्द्रीय परिषद अधिनियम 1973 में संशोधन को मंजूरी दे दी। इस संशोधन के जरिए केन्द्र सरकार द्वारा होम्योपैथी मेडिकल कॉलेजों को पाठ्यक्रम व पाठ्यक्रमों को जारी रखने की अनुमति दिए जाने के प्रावधान तैयार किए जाएंगे। इससे केवल मेडिकल कॉलेजों द्वारा गुणवत्तापूर्ण होम्योपैथी शिक्षा दिया जाना सुनिश्चित होगा।
सभी मेडिकल कॉलेजों द्वारा वार्षिक प्रवेश के लिए केन्द्र सरकार से मंजूरी लेना अनिवार्य किया जा रहा है। साथ ही तय मानदंडों पर खरे उतरने वाले कॉलेजों को पांच साल के लिए अनुमति दिए जाने का प्रावधान भी जोड़ा गया है। यह संशोधन गुणवत्तापूर्ण होम्योपैथी शिक्षा सुनिश्चित करेगा जिससे होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति के जरिए बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। 
पृष्ठभूमि : होम्योपैथी केन्द्रीय परिषद अधिनियम, 1973 के मौजूदा प्रावधान उन वर्तमान कॉलेजों में दाखिला रोकने में केंद्र सरकार को समर्थ नहीं कर पा रहे हैं जो अधिनियम के तहत बनाए गए नियमों में निर्धारित मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं। इस वजह से होम्योपैथी शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है। अतः संशोधन के परिणामस्वरूप मौजूदा कॉलेजों में मानक बेहतर होकर निर्धारित स्तरों तक पहुंच जाएंगे और इसके साथ ही मौजूदा होम्योपैथिक कॉलेजों में भी बुनियादी ढांचे, सुविधाओं एवं श्रमबल के वही मानक सुनिश्चित हो जायेंगे, जो नए कॉलेजों के लिए आवश्यक होंगे।