COPYRIGHT © Rajiv Mani, Journalist, Patna

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गुरुवार, 3 मार्च 2016

बजट बोले तो गांव और गरीब

केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा में साल 2016-17 का बजट पेश किया। बजट में इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया। पीएफ को लेकर जेटली ने बड़ा ऐलान किया और कहा कि सरकार पहले तीन साल तक नए कर्मचारियों का ईपीएफ का हिस्सा देगी। पहली बार 50 लाख रुपये तक का मकान खरीदने पर 50 हजार रुपये की टैक्स में छूट मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने बजट के लिए जेटली को बधाई दी और कहा कि गांव, गरीब और महिलाओं पर हमारा फोकस है।
पीएफ के लिए सरकार 1 हजार करोड़ का फंड देगी। सर्विस टैक्स को बढ़ाकर 14.5 से 15 फीसदी कर दिया गया है। जेटली ने डिफेंस के लिए 3.41 लाख करोड़ के बजट का प्रस्ताव रखा है, जो पिछली बार के मुकाबले 14 फीसदी ज्यादा है।
संसद में बजट पेश करने के बाद मीडिया से मुखातिब हुए वित्तमंत्री ने कहा कि सरकार ने अगर ज्यादा कमाया है, तो ज्यादा खर्च भी कर रही है। जेटली ने आगे कहा, ‘‘इस बार का बजट काफी संतुलित है। हम एसेट डायवर्जन स्कीम शुरू करेंगे। हमने पर्यावरण के लिए खतरनाक चीजों पर टैक्स लगाया है।’’ वित्तमंत्री ने आगे कहा कि सरकार वित्तीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करके रहेगी। बीते 15 महीनों में महंगाई दर नकारात्मक रही है और इस साल भारत की रेटिंग में कोई बदलाव नहीं आया है। जेटली ने बजट पढ़ते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वे राहुल गांधी की मांग को स्वीकार करते हैं। राहुल ने दिव्यांगों के काम आने वाले ब्रेल पेपर को ड्यूटी से मुक्त रखने की मांग की थी। जेटली ने बजट भाषण में कहा, ‘‘मैं राहुल गांधी का दिव्यांगों को राहत देने का प्रस्ताव स्वीकार करता हूं।’’
वित्त मंत्री का बजट में सबसे ज्यादा फोकस गांवों और गरीबों पर रहा। जाहिर तौर पर उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले सरकार ने अपनी गरीब विरोधी छवि बदलने की कोशिश की है। जेटली ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए 19 हजार करोड़ रुपये जारी किए जाएंगे। 1 मई, 2018 तक हर गांव तक बिजली पहुंचा देंगे। 62 नवोदय विद्यालय खोले जाएंगे। मनरेगा योजना के लिए 38 हजार 500 करोड़ रुपये का आवंटन करेंगे।
जेटली ने बजट भाषण शुरू करते हुए कहा, ‘‘कश्ती चलाने वालों ने जब हारकर दी पतवार हमें, लहर-लहर तूफान मिले, फिर भी दिखाया है हमने और फिर ये दिखा देंगे सबको कि इन हालत में आता है दरिया करना पार हमें।’’ वित्तमंत्री ने कहा कि दुनियाभर में मंदी है, लेकिन हम लगातार देश के आर्थिक हालात सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। रोड और रेलवे पर 2.18 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे। मोटर व्हीकल एक्ट में बदलाव करके यातायात सुगम किया जाएगा। दो बंद एयरपोर्ट को फिर से शुरू किया जाएगा। इसपर 100 करोड़ रुपये खर्च होंगे। 2 हजार किलोमीटर स्टेट हाइवेज को नेशनल हाइवे में बदला जाएगा। हर गरीब परिवार को एक लाख रुपये का हेल्थ इंश्योरेंस कवर दिया जाएगा। नई स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत 60 साल से उपर के लोगों को इस स्कीम में 30,000 रुपये अतिरिक्त लाभ दिया जाएगा।

बिहार को मिली निराशा, नहीं मिला विशेष पैकेज

केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली द्वारा लोकसभा में पेश किए गए 2016-17 के आम बजट में बिहार को विशेष पैकेज नहीं देने पर प्रदेश के लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। ज्यादातर लोगों ने निराशा प्रकट की है। वहीं स्वास्थ्य बीमा का स्वागत किया गया है। ज्यादातर लोग इसे गरीबों, किसानों और आम लोगों का बजट बता रहे हैं। बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष रामलाल खेतान ने बजट को गांव और आम लोगों का बजट बताया। उन्होंने कहा, ‘‘यह बजट देश के 70 प्रतिशत लोगों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, लेकिन बिहार जैसे पिछड़े राज्यों के लिए विशेष पैकेज की बात नहीं की गई है, जिससे यह बजट बिहार के लिए उतना सुखद नहीं है।’’ उन्होंने कालेधन को सामने लाने के सरकार के प्रयास की सराहना की।
वरिष्ठ अर्थशास्त्री और पटना कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. नवल किशोर चैधरी ने बजट को दीर्घकालीन सुधार वाला बजट बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार द्वारा पेश इस बजट में आधारभूत संरचनाओं के विकास पर जोर दिया गया है। सरकार ने वित्तीय हालात को देखते हुए कुछ अच्छे कदम उठाए हैं, लेकिन खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में बाहरी कंपनियों के आने से स्थानीय उद्योगों को नुकसान हो सकता है। पटना के जानेमाने अर्थशास्त्री शैवाल गुप्ता ने बजट को सामान्य बताते हुए कहा कि बिहार के लोगों को इस बजट से उम्मीदें थीं, लेकिन इस बजट में बिहार को खास तौर पर कुछ भी नहीं मिल सका। बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष ओपी शाह ने बजट को मिलाजुला बताया। उन्होंने कहा, ‘‘वित्तमंत्री ने बजट में आधारभूत संरचना का जो प्रावधान किया है, उससे देश को आर्थिक विकास में मदद मिलेगी।’’ हालांकि उन्होंने बिहार के लिए विशेष पैकेज नहीं दिए जाने पर नाखुशी जताई। 
बिहार सचिवालय के कर्मचारी रत्नेश कुमार का मानना है कि बजट में लोगों को स्वास्थ्य बीमा दिया जाना स्वागत योग्य है। एक निजी विद्यालय की शिक्षिका रोमा श्रीवास्तव कहती हैं कि देश में 62 नवोदय विद्यालय खोलने के प्रस्ताव का स्वागत होना चाहिए। इसके अलावा विद्यालय परित्याग प्रमाणपत्र के लिए डिजिटल डिपॉजिटरी की भी प्रशंसा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बिहार में पूंजी निवेश को बढ़ाने के लिए बजट में कोई चर्चा नहीं की गई है, जो बिहार के विकास के लिए सबसे जरूरी है। 
 अहम बिंदु 
  1. व्यक्तिगत आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं
  2. एक करोड़ रुपये से ज्यादा आय पर सरचार्ज बढ़ा
  3. मकान भत्ता 24 हजार से बढ़ाकर 60 हजार किया गया
  4. पहली बार घर खरीदने पर ब्याज में छूट
  5. किराये के मकान में रहनेवालों को 24,000 रुपये सालाना के बजाय अब 60,000 रुपये की कर राहत। हाउस रेंट की छूट बढ़ाई गई
  6. 5 लाख तक की आय पर टैक्स में तीन हजार का फायदा, छोटे कर दाताओं को बजट में बड़ी राहत
  7. 50 लाख रुपये तक के घर पर 50,000 हजार रुपये की अतिरिक्त छूट
  8. चांदी को छोड़कर अन्य आभूषणों पर एक प्रतिशत का उत्पाद शुल्क
  9. 5 लाख रपये से कम की आय वाले आयकरदाताओं को राहत। धारा 87 एक के तहत छूट की सीमा 2,000 से बढ़ाकर 5,000 रुपये की गई
  10. 2017-18 तक राजकोषीय घाटा सकल घरेल उत्पाद के 3 प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य
  11. 2015-16 में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 3.9 प्रतिशत। 2016-17 में यह 3.5 प्रतिशत होगा।

 महंगा 
  • 10 लाख से ज्यादा की कार महंगी हर तरह की गाडि़यां महंगी
  • डीजल गाडि़यों पर 2.5 फीसदी टैक्स बढ़ा
  • एसयूवी में 4 फीसदी टैक्स बढ़ा
  • सिगरेट महंगी, बीड़ी छोड़कर हर तंबाकू उत्पाद महंगा
  • सोने और हीरे के गहने महंगे
  • मोबाइल बिल और होटल में खाना हुआ महंगा
  • रेडीमेड कपड़े महंगे
  • सर्विस टैक्स 14.5 से बढ़कर 15 फीसदी हुआ
  • जिम में जाना, रेल ई-टिकट खरीदना महंगा
  • ब्यूटी पार्लर जाना महंगा।

 सस्ता 
  • मोबाइल, डेस्कटॉप, लैपटॉप, टैबलेट
  • दिव्यांगों की मदद से जुड़े इक्विपमेंट्स
  • डायलिसिस इक्विपमेंट्स।