COPYRIGHT © Rajiv Mani, Journalist, Patna

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मंगलवार, 21 फ़रवरी 2017

अनुसूचित जातियों के हस्तशिल्प कारीगरों के कल्याण के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : कपड़ा मंत्रालय और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने आपस में हाथ मिलाया है, ताकि अनुसूचित जातियों के अनुमानित 12 लाख कारीगरों के आर्थिक विकास के लिए और भी ज्यादा आवश्यक कदम उठाये जा सकें। कपड़ा मंत्रालय के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधीनस्थ केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (पीएसयू) राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसएफडीसी) के बीच एक सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए, जिसका उद्देश्य देश भर में कार्यरत उन कारीगरों की आमदनी बढ़ाने के लिए आपस में मिल-जुलकर काम करना है, जो अनुसूचित जातियों से जुड़ी श्रेणियों के अंतर्गत आते हैं। केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति जुबिन इरानी और केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत की मौजूदगी में इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। वस्त्र सचिव रश्मि वर्मा और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय में सचिव लता कृष्ण राव भी इस अवसर पर उपस्थित थीं।
इस एमओयू के तहत विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) के कार्यालय और एनएसएफडीसी के बीच निरंतर एवं विस्तृत सहयोग सुनिश्चित किया जायेगा, जिसके उद्देश्य निम्नलिखित हैं -
  • जागरूकता शिविर लगाकर विभिन्न योजनाओं के बारे में प्रचार-प्रसार करके जरूरतों का आकलन करने के साथ-साथ संबंधित कमियों की पहचान करना।
  • उन चिन्हित क्लस्टरों में जरूरत आधारित विस्तृत कौशल उन्नयन के काम पूरे करना भी एक अन्य उद्देश्य है, जहां अनुसूचित जातियों के कारीगर बड़ी संख्या में मौजूद हैं। अनूठे एवं बाजार अनुकूल डिजाइनों के क्षेत्र में और आधुनिक उपकरणों एवं तकनीकों को अपनाने के लिए इन कारीगरों के कौशल का उन्नयन किया जायेगा।
  • घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय विपणन कार्यक्रमों में अनुसूचित जातियों के कारीगरों और उनके उत्पादक समूहों की भागीदारी बढ़ाना।
  • कपड़ा मंत्रालय और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा दिए जाने वाले लाभों को आपस में संयुक्त करते हुए अनुसूचित जातियों के कारीगरों को रियायती दरों पर कार्यशील पूंजी से संबंधित ऋण मुहैया कराना।

एमओयू में इस बात पर भी सहमति जताई गई है कि विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) का कार्यालय अपनी विभिन्न योजनाओं के लिए परियोजना संबंधी रिपोर्टों को तैयार करने और अनुसूचित जातियों के कारीगरों की जरूरतों को चिन्हित करने के लिए क्षेत्र (फील्ड) संबंधी अध्ययन कराने के लिए एनएसएफडीसी की सहायता करेगा। विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) के कार्यालय के छह क्षेत्रीय कार्यालयों और 52 विपणन एवं सेवा विस्तार केंद्रों की सहायता का विस्तार करने के अतिरिक्त इस तरह की सहायता दी जाएगी। उपर्युक्त एमओयू पर विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) आलोक कुमार और एनएसएफडीसी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक श्याम कपूर ने हस्ताक्षर किए।   

गरीबों के लिए याचिका दाखिल करना आसान हुआ 

नई दिल्ली : मध्यम और गरीब आय वर्ग के लोगों के लिए देश की कानूनी सहायता लेना आसान हो गया है। माननीय उच्चतम न्यायालय ने मध्यम आय समूह योजना लागू की है। यह आत्म समर्थन देने वाली योजना है और इसके तहत 60,000 रुपये प्रति महीने और 7,50,000 रुपये वार्षिक आय से कम आय वाले लोगों के लिए कानूनी सहायता दी जाएगी।
सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1860 (2) के अन्तर्गत सोसायटी के प्रबंधन का दायित्व गवर्निंग बॉडी के सदस्यों को दिया गया है। गवर्निंग बॉडी में भारत के प्रधान न्यायाधीश संरक्षक होगे। अटार्नी जनरल पदेन उपाध्यक्ष होंगे। सोलिसीटर जनरल ऑफ इंडिया मानद सदस्य होंगे और उच्चतम न्यायालय के अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता सदस्य होंगे।
उच्चतम न्यायालयों के नियमों के अनुसार न्यायालय के समक्ष याचिका केवल एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड के जरिये दाखिल की जा सकती है।
सेवा शुल्क के रूप में उच्चतम न्यायालय मध्य आय समूह कानूनी सहायता सोसाइटी (एससीएमआईजीएलएएस) को 500 रुपये का भुगतान करना होगा। आवेदक को सचिव द्वारा बताई गई फीस जमा करानी होगी। यह योजना में संलग्न अनुसूची के आधार पर होगी। एमआईजी कानूनी सहायता के अंतर्गत सचिव याचिका दर्ज करेंगे और इसे पैनल में शामिल एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड, दलील पेश करने वाले वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता को भेजेगे।
यदि एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड इस बात से संतुष्ट हैं कि यह याचिका आगे की सुनवाई के लिए उचित है, तो सोसाइटी आवेदक के कानूनी सहायता अधिकार पर विचार करेगी। जहां तक योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदक की पात्रता का प्रश्न है, याचिका के बारे में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड की राय अंतिम राय मानी जाएगी।
योजना के अंतर्गत मध्यम वर्ग के वैसे लोग जो उच्चतम न्यायालय में मुकद्दमों का खर्च नहीं उठा सकते, वे कम राशि देकर सोसाइटी की सेवा ले सकते है। इस योजना के लाभ लेने के इच्छुक व्यक्ति को निर्धारित फाॅर्म भरना होगा और इसमें शामिल सभी शर्तों को स्वीकार करना होगा।
योजना के अनुसार याचिका के संबंध आने वाले विभिन्न खर्चों को पूरा करने के लिए आकस्मिक निधि बनाई जाएगी। याचिका की स्वीकृति के स्तर तक आवेदक को इस आकस्मिक निधि में से 750 रुपये जमा कराने होंगे। यह सोसाइटी में जमा किये गये शुल्क के अतिरिक्त होगा। यदि एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड यह समझते हैं कि याचिका आगे अपील की सुनवाई योग्य नहीं है, तो समिति द्वारा लिये गये न्यूनतम सेवा शुल्क 750 रुपये को घटाकर पूरी राशि चैक से आवेदक को लौटा दी जाएगी।
यदि योजना के अन्तर्गत नियुक्त अधिवक्ता सौंपे गये केस के मामले में लापरवाह माने जाते हैं, तो उन्हें आवेदक से प्राप्त फीस के साथ केस को वापस करना होगा। इस लापरवाही की जिम्मेदारी सोसाइटी पर नहीं होगी और मवक्कील से जुड़े अधिवक्ता की पूरी जिम्मेदारी होगी। अधिवक्ता का नाम पैनल से समाप्त कर दिया जाएगा। समाज के कम आय वर्ग के लोगों के लिए याचिका दाखिल करने के काम को सहज बनाने के लिए माननीय उच्चतम न्यायालय ने यह योजना लागू की है।

शहरी गरीबों के लिए 90,095 और किफायती मकानों को मंजूरी 

नई दिल्ली : आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय ने 5,590 करोड़ रुपये के निवेश एवं 1,188 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत शहरी गरीबों के हित में 90,095 और किफायती मकानों के निर्माण को मंजूरी दी।
मध्य प्रदेश के लिए 5260 करोड़ रुपये के निवेश एवं 1071 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता के साथ 49 शहरों एवं कस्बों में 82,262 मकानों को मंजूरी दी गई है। इसी तरह जम्मू-कश्मीर के लिए 240 करोड़ रुपये के निवेश एवं 74 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता के साथ 24 शहरों एवं कस्बों में 4915 मकानों को मंजूरी दी गई है। वहीं, दादर एवं नागर हवेली की राजधानी सिलवासा के लिए 26 करोड़ रुपये के निवेश एवं 12 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता के साथ 803 किफायती मकानों को स्वीकृति दी गई है।
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के लाभार्थी की अगुवाई वाले निर्माण (बीएलसी) घटक के तहत 46,823 नए मकानों के निर्माण, बीएलसी के तहत जम्मू-कश्मीर में 773 मकानों के विस्तारीकरण और भागीदारी में किफायती आवास (एएचपी) घटक के तहत मध्य प्रदेश में 42499 नए मकानों के निर्माण को मंजूरी दी गई।
मध्य प्रदेश में 39763 और नए मकानों का निर्माण बीएलसी घटक के तहत किया जाएगा, जिसके अंतर्गत किसी भी पात्र लाभार्थी को अपने स्वामित्व वाली भूमि पर एक मकान बनाने के लिए सहायता दी जाती है। मध्य प्रदेश में शहरवार मंजूरियों में ये शामिल हैं : इंदौर-30789 मकान, रतलाम-6419, सागर-3,156, उज्जैन-2884, कटनी-2800, शिवपुरी-2625, छिंदवाड़ा-2508, नागदा-2,073, जबलपुर-2,012, दतिया-1,726, सिंगरौली-1,716, डबरा-1720, विदिशा-1513, दमोह-1480, सीहोर-1,200, सिधी-1,057, आस्था-1000 और ऊंचेाहारा-1,000
जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर के लिए 663 किफायती मकानों को स्वीकृति दी गई है। इसी तरह जम्मू-कश्मीर में अन्य मंजूरियों में ये शामिल हैं : हंदवाड़ा-602, बड़गाम-476, बारामूला-393, डोडा-306, पुलवामा-270, कारगिल-261, सोपोर-205, गांदरबल-185, भद्रवाह-176, शोपियां-159, आरएस पुरा-143, सांबा-121, किश्तवार-113, लेह-99 और पुंछ-96 ।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत मध्य प्रदेश के लिए स्वीकृत मकानों की कुल संख्या बढ़कर 187135 और जम्मू-कश्मीर के लिए स्वीकृत मकानों की कुल संख्या बढ़कर 5864 हो गई है। दी गई मंजूरियों के साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत 89072 करोड़ रुपये के कुल निवेश एवं 25819 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता के साथ शहरी गरीबों के हित में अबतक कुल मिलाकर 16,51,687 किफायती मकानों के निर्माण को स्वीकृति दी गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के बीएलसी और एएचपी घटकों के तहत हर लाभार्थी को 1.50 लाख रुपये की केंद्रीय सहायता दी जाती है।
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