COPYRIGHT © Rajiv Mani, Journalist, Patna

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बुधवार, 1 मार्च 2017

नंद कुमार साई राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ आदिवासी नेता और पूर्व सांसद नंद कुमार साई ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) के अध्यक्ष का पदभार संभाल लिया। इस अवसर पर श्री साई ने कहा कि वह देश के दूर-दराज इलाकों में रहने वाले आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा करने की भरसक कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि हमारे देश में रहने वाले ज्यादातर आदिवासीगण संविधान द्वारा उन्हें प्रदत्त अधिकारों से अब भी अनभिज्ञ हैं। श्री साई ने कहा कि वह इस बात पर गौर करेंगे कि देश में अनुसूचित जनजातियों के लोगों के समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए एनसीएसटी एक महत्वपूर्ण साधन में तब्दील हो जाए।
इससे पहले एनसीएसटी के कार्यालय में उनके आगमन पर श्री साई की अगवानी एनसीएसटी की उपाध्यक्ष अनुसुइया यूइके, सांसद बारी कृष्ण दामोर एवं हर्षदभाई चुनीलाल वसावा और आयोग के सचिव राघव चन्द्र ने की।
छत्तीसगढ़ के जसपुर जिले के भगोरा गांव में 1 जनवरी, 1946 को जन्मे श्री साई ने जसपुर स्थित एनईएस कॉलेज में अपना अध्ययन कार्य संपन्न किया और रायपुर स्थित पंडित रवि शंकर शुक्ला विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की। श्री साई वर्ष 1977, 1985 और वर्ष 1998 में मध्यप्रदेश विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए। वह वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए और वह विधानसभा में विपक्ष के प्रथम नेता थे। श्री साई वर्ष 1989, 1996 और वर्ष 2004 में लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। वह वर्ष 2009 और 2010 में राज्यसभा के लिए भी निर्वाचित हुए। वह कोयले एवं इस्पात पर गठित स्थायी संसदीय समिति के सदस्य भी रह चुके हैं और इसके साथ ही वह शहरी विकास मंत्रालय और सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति के सदस्य भी रह चुके हैं।
श्री साई आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा के प्रसार में काफी सक्रिय रहे हैं। निषेध के प्रबल समर्थक श्री साई आदिवासियों के शोषण एवं उन पर अत्याचार के विरोध स्वरूप शुरू किए गए विभिन्न आंदोलनों की कमान संभालते रहे हैं।

सड़कों पर जीवन यापन करने वाले बच्चों के संरक्षण व देखभाल के लिए मानक संचालन प्रक्रिया का शुभारंभ

नई दिल्ली : सड़कों पर जीवन यापन करने पर विवश बच्चों के संरक्षण एवं देखभाल के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का शुभारंभ नई दिल्ली में महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका संजय गांधी द्वारा किया गया, जिसका उद्देश्य उनके पुनर्वास के साथ-साथ हिफाजत को भी सुनिश्चित करना है। इससे पहले एसओपी का शुभारंभ एक समारोह में किया गया, जिसमें दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश माननीया मुक्ता गुप्ता, एनसीपीसीआर की अध्यक्ष स्तुति कक्कड़, जानी-मानी फिल्म अभिनेत्री एवं सेव द चिल्ड्रेन की ब्रांड अम्बेसडर दीया मिर्जा, सेव द चिल्ड्रेन इन इंडिया के अध्यक्ष हरपाल सिंह और सेव द चिल्ड्रेन इंटरनेशनल के सीईओ थॉमस चांडी भी इस अवसर पर उपस्थित थे। एनसीपीसीआर ने सड़कों पर जिंदगी गुजारने पर मजबूर बच्चों के लिए इस अत्यावश्यक रणनीति को विकसित करने हेतु सिविल सोसायटी ऑर्गेनाइजेशन (सीएसओ), सेव द चिल्ड्रेन के साथ गठबंधन किया।
एनसीपीसीआर ने सड़कों पर जीवन यापन कर रहे बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण के लिए आवश्यक कदमों वाली एक विस्तृत रूपरेखा तय करने का निर्णय लिया, क्योंकि इस तरह के बच्चों की समस्याएं बहुआयामी एवं जटिल होती हैं। एसओपी का लक्ष्य मौजूदा वैधानिक एवं नीतिगत रूपरेखा के अंतर्गत विभिन्न कदमों को दुरुस्त करना है। एसओपी का उद्देश्य उन प्रक्रियाओं को चिन्हित करना है, जिनपर अमल तब किया जायेगा, जब सड़कों पर जीवन यापन करने वाले किसी बच्चे की पहचान एक जरूरतमंद बच्चे के रूप में हो जायेगी। ये प्रक्रियाएं नियमों एवं नीतियों की मौजूदा रूपरेखा के अंतर्गत ही होगी और इनकी बदौलत विभिन्न एजेंसियों द्वारा उठाये जाने वाले कदमों में समुचित तालमेल संभव हो पायेगा। इसके अलावा, ये प्रक्रियाएं इन बच्चों की देखभाल, संरक्षण एवं पुनर्वास के लिए समस्त हितधारकों हेतु कदम-दर-कदम दिशा-निर्देश के रूप में होगी।
एसओपी के शुभारंभ के अवसर पर मेनका संजय गांधी ने कहा, ‘हमारी सरकार भारत में हर बच्चे की खुशहाली के लिए प्रतिबद्ध है। इस पहल से सरकार को यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि स्वास्थ्य संबंधी शिक्षा एवं संरक्षण संबंधी सुविधाएं सड़कों पर जीवन यापन करने वाले बच्चों को भी सुलभ हों।’
विभिन्न क्षेत्रों में किये गये विस्तृत शोध अध्ययनों के निष्कर्षों के साथ-साथ 35 एनजीओ के साथ पटना, लखनऊ, हैदराबाद और मुम्बई में किये गये क्षेत्रीय विचार-विमर्श से उभर कर सामने आये सुझावों पर गौर करने के बाद ही एसओपी तैयार की गई। एसओपी को तैयार करने से पहले दिल्ली में उन बच्चों से भी एनसीपीसीआर में सलाह-मशविरा किया गया, जो सड़कों पर जीवन यापन करने की विवशता से अपने-आपको उबार चुके हैं।
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