COPYRIGHT © Rajiv Mani, Journalist, Patna

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बुधवार, 27 जुलाई 2016

पशु विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना होगी

पटना : पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के मंत्री अवधेश कुमार सिंह ने सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के संवाद कक्ष में आयोजित संवाद सम्मेलन में कहा कि राज्य सरकार बिहार के विकास के लिए सुनियोजित ढंग से कार्य कर रही है। बिहार कृषि प्रधान राज्य है। कृषकों को खुशहाल बनाने के लिए सरकार विभिन्न योजनाएं चला रही है। पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए इसी वर्ष पशु विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना की जायेगी। उन्होंने कहा कि पशुओं की उचित देखभाल नहीं होने के कारण किसानों को जानकारी के अभाव में संकटों से जुझना पड़ता है। साथ ही पशुधन निरीक्षकों की नियुक्ति की जायेगी। 
उन्होंने कहा कि कृषि विकास योजना के अन्तर्गत दुग्ध समितियों का गठन, दुग्ध संग्रहण केन्द्र की स्थापना, स्वचालित दुग्ध संग्रहण केन्द्र की स्थापना, स्वचालित मिल्किंग मशीन की स्थापना, चीज पैकिंग मशीन की स्थापना आदि के लिए राशि की मंजूरी दी गई है। डेहरी-ओन-सोन में पूर्व से स्थापित चीज मेकिंग मशीन के साथ उत्पादित चीजों की पैकिंग और कटिंग कर छोटे-छोटे पैकेट में उपभोक्ताओं को दिया जायेगा। कंफेड के द्वारा पांच वर्षों में दुध के संग्रहण को देखते हुए नये डेयरी संयत्रों, पशु आहार संयत्र स्थापित कर उसकी प्रोसेसिंग के लिए एलसीडीसी से ऋण ली गयी है।
अवधेश कुमार सिंह ने समग्र गव्य विकास योजना पर बल देते हुए कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को इसके द्वारा सुदृढ़ किया जायेगा। यह स्वरोजगार का अच्छा माध्यम है। इसका उद्देश्य है कि हर व्यक्ति को न्यूनतम पौष्टिक आहार के रूप में दुध उपलब्ध हो, ताकि राज्य दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो सके। समग्र गव्य विकास योजना के लिए 2015-16 में 61 करोड़ 67 लाख 75 हजार रुपये की मंजूरी दी गयी है। यहां के पशुपालकों को कोलकाता, हैदराबाद अन्य राज्यों में प्रशिक्षण के लिए भेजा जा रहा है। कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम के अन्तर्गत 26.34 लाख पशुओं का गर्भधारण हुआ। सांडो की संख्या बढ़ाने के लिए भी एक रूपरेखा तैयार की गयी है। 
उन्होनंे बताया कि एम्बुलेटी भान के माध्यम से पशुपालकों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। 1799 शिविर लगाकर 3.49 लाख पशुओं के मल, मुत्र, रक्त की जांच की गयी और टीकाकरण भी हुआ। 1.70 लाख पशुओं का बधियाकरण भी हुआ। उन्होंने मत्स्य प्रक्षेत्र की विकासोन्मुख योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि मछली पालन में असीम संभावनाएं हैं। राज्य की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि, पशुपालन एवं मत्स्य पालन पर निर्भर है। राज्य के विकास में मत्स्य पालन का अहम स्थान है। इससे पौष्टिक आहार के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को रोजगार भी मिलता है। झारखंड राज्य के विभाजन के बाद मत्स्य पालन प्रमुख रोजगार के रूप में उभरा है। 
राज्य में करीब 93296 हेक्टर में तालाब एवं पोखरे, 26303 हेक्टर में जलाशय, 9000 हेक्टर में मन और 9.41 लाख हेक्टर में जलजमाव आद्र भूमि हैं। प्रतिवर्ष बिहार में 5.81 लाख टन मछली की आवश्यकता है। उत्पादन 4.79 लाख टन के करीब है। इसे बढ़ावा देने के लिए नये तालाब के निर्माण, मत्स्य बीज हेचरी का निर्माण, ट्यूबवेल तथा पंपसेट का अधिष्ठापन, सरकारी तालाब का जीर्णोद्धार, मत्स्य अंगूलिकाओं के वितरण की योजना चालाई जा रही है। 
अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए विशेष अनुदान पर नर्सरी एवं तालाब, ट्यूबवेल, पंपसेट का अधिष्ठापन किया जा रहा है। आधा एकड़ के नर्सरी, तालाब के निर्माण के लिए 1.51 लाख की राशि निर्धारित की गई है। इसपर 90 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अन्तर्गत 50 प्रतिशत अनुदान पर पांच मत्स्य बीज हेचरी, 74.88 हेक्टर नये तालाब का निर्माण एवं 86 ट्यूबवेल का निर्माण हुआ है। 
अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए विशेष घटक योजना के अन्तर्गत 90 प्रतिशत अनुदान पर 165.40 एकड़ जल क्षेत्र में नर्सरी, तालाबों का निर्माण एवं 108 ट्यूबवेल का अधिष्ठापन का निर्माण किया गया है। मछुआरों के लिए सामूहिक दुर्घटना बीमा की योजना के अन्तर्गत विभिन्न जिलों के 29 बीमा दावों को निष्पादन के लिए फिस्फोफेड के द्वारा बीमा कम्पनी को दिया गया, जिसमें 6 दावों का भुगतान हो चुका है। वित्तीय वर्ष 2015-16 में जीविका के माध्यम से चुजें वितरित किये गये हैं। अण्डा उत्पादन में वृद्धि के लिए लेयर मुर्गी फाॅर्म की स्थापना पर अनुदान की योजना चलायी जा रही है। 50 लाख प्रति की दर से अनुमानित लागत वाले पांच हजार लेयर मुर्गी फाॅर्म फिड मिल सहित की स्थापना पर 50 प्रतिशत अनुदान की योजना पर मंजूरी दी गयी है, जिसके तहत 2015-16 में अबतक 6 लाभुकों को अनुदान का लाभ दिया गया है। 
बकरी पालन एवं कुकूट पालन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में बैकयार्ड, मुर्गी पालकों एवं बीपीएल परिवारों को अनुदानित दर पर चुजें वितरण किये जा रहे हैं। बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए पूर्णियां के मिरंगा में विशेष योजना चलायी जा रही है।