COPYRIGHT © Rajiv Mani, Journalist, Patna

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मंगलवार, 6 सितंबर 2016

बिहार-झारखंड में कुष्ठ रोग निदान अभियान की शुरुआत

 संक्षिप्त खबरें 
19 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में 32 करोड़ लोगों की जांच की जाएगी 
नई दिल्ली : भारत से कुष्ठ रोग के आमूल उन्मूलन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुपालन में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने राष्ट्रीय कुष्ठ निवारण कार्यक्रम की समीक्षा की। इसके अनुरुप स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने अबतक का सबसे बड़ा कुष्ठ रोग निदान अभियान (एलसीडीसी) शुरू किया है। यह अभियान 5 सितंबर, 2016 से 19 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के 149 जिलों में शुरु कर दिया गया है। उक्त अभियान 15 दिन चलेगा और इस दौरान उपरोक्त जिलों के 1656 संभागों, शहरी क्षेत्रों के कुल 32 करोड़ लोगों की जांच की जाएगी। इस काम में 2,97,604 टीमों को लगाया गया है, जिनमें एक महिला आशाकर्मी और एक पुरुष स्वयंसेवी शामिल हैं। ये टीमें निर्धारित क्षेत्रों के प्रत्येक घर का दौरा करेंगी और कुष्ठ रोग के संबंध में परिवार के सभी सदस्यों की जांच करेंगी। 
इस अभियान के तहत जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को रखा गया है, उनमें आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, नगालैंड, ओडिशा, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, चंडीगढ़, दादरा एवं नागर हवेली, दिल्ली और लक्षद्वीप शामिल हैं। इस अभियान में उन जिलों को शामिल किया गया है, जहां पिछले तीन सालों में कुष्ठ रोग दर 10,000 की आबादी पर एक से अधिक मामलों में पाई गई है। 
कुष्ठ रोग निदान अभियान दुनिया में अपनी तरह का अनोखा कदम है, जिसके तहत लक्षित आबादी के प्रत्येक सदस्य की जांच की जाएगी। यह जांच एक पुरुष और एक महिला स्वयंसेवी वाली खोजी टीमें करेंगी। यह जांच टीमें घर-घर जाएंगी और स्थानीय क्षेत्र से संबंधित योजना के अनुसार अचिन्हित कुष्ठ रोग के मामलों की जांच करेंगी। अभियान का उद्देश्य है कि प्रभावित व्यक्तियों में कुष्ठ रोग का शुरुआत में ही निदान कर लिया जाए, ताकि उन्हें शारीरिक अक्षमता और अंगों की खराबी से बचाया जा सके। इसके अलावा ऐसे लोगों का समय पर उपचार किया जाएगा, ताकि सामुदायिक स्तर पर रोग के फैलाव को रोका जा सके। 
पहला एलसीडीसी मार्च-अप्रैल, 2016 को 7 राज्यों के 50 जिलों में शुरू किया गया था। इसके तहत बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तर प्रदेश को रखा गया था तथा लगभग 60.8 करोड़ आबादी इसके दायरे में थी। अभियान के दौरान 65427 शंकित मामलों की पहचान की गई थी, जिनमें से बाद में 4120 मामले सही पाए गए थे। 

किसानों से मूंग दाल खरीदेगी केन्द्र सरकार

नई दिल्ली : केन्द्र सरकार ने देश के किसानों से मूंग की खरीद करने का निर्णय लिया है। ज्ञात हो कि कई वर्षों से मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित होता था, परंतु खरीद नहीं होती थी। इस वर्ष महाराष्ट्र एवं कर्नाटक के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मूंग की खरीद करने के प्रस्ताव आने पर कृषि मंत्रालय ने 1 अक्तूबर, 2016 से लागू होने वाले न्यूनतम समर्थन मूल्य को 1 सितम्बर से लागू कर दिया है और खरीद के आदेश जारी कर दिये हैं। अतः खरीफ 2016 के लिए मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 4,850 रुपये 425 बोनस अर्थात रुपये 5,275 प्रति क्विंटल को 1 अक्तूबर, 2016 से लागू होना था। परंतु मूंग बाजार में अभी से आनी शुरु हो गई है, इसलिए किसानों के हितों का ध्यान रखते हुए कृषि मंत्रालय ने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए इस तिथि को 1 सितम्बर, 2016 कर दिया है। यहां यह भी बताना जरुरी है कि इस वर्ष मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य पिछले वर्ष के 4,650 रुपये 200 बोनस अर्थात् रुपये 4,850 प्रति क्विंटल की तुलना में रुपये 425 प्रति क्विंटल अधिक है। 
राजस्थान, मध्य प्रदेश व तेलंगाना राज्यों में कृषि मंत्रालय की संस्था नैफेड ने खरीद की संपूर्ण तैयारियां कर ली हैं। राज्यों से प्रस्ताव आते ही खरीद के आदेश जारी कर दिए जाएंगे। अन्य सभी राज्यों से भी अनुरोध किया जा रहा है कि यदि उनके यहां मूंग दाल के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे जाते हैं, तो किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए वे यथाशीघ्र मूंग की खरीद का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजें, जिससे कि उन प्रदेशों में भी खरीद की जा सके।