COPYRIGHT © Rajiv Mani, Journalist, Patna

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बुधवार, 31 अगस्त 2016

‘एक माह में आधारकार्ड में लगे शिक्षकों के फोटो स्कूलों में लगाये जाये’

  • कुछ शिक्षक खुद पढ़ाने के बदले 5-6 हजार रुपए पर दूसरे को रख लिए हैं
  • जो शिक्षक आधारवाली फोटो स्कूलों में नहीं लगायेंगे, उनके वेतन कटेंगे : रघुवर दास
  • गुमला की बेटियों को रोजगार उपलब्ध कराएं
  • बेटियों को पलायन करानेवाले बिचैलियों को सलाखों में डालें
रांची : मुख्यमंत्री रघुवर दास ने राज्य के सभी उपायुक्तों को निदेश दिया कि अपने-अपने जिलों में एक महीने के अंदर यह सुनिश्चित करें कि सभी विद्यालयों में नियुक्त शिक्षक आधारकार्ड में लगे अपना फोटो स्कूल में अवश्य टांगे, ताकि स्कूल में पढ़ रहे बच्चे और बच्चियों के अभिभावक यह जान सकें कि उनके विद्यालय में कौन-कौन से शिक्षक पढ़ाने हेतु कार्यरत हैं, क्योंकि राज्य सरकार को ऐसी सूचना मिली है कि कुछ विद्यालयों में भाड़े के शिक्षकों को विद्यालयों में नियुक्त शिक्षकों ने स्वयं के बदले में रखा है और इसके बदले में वे भाड़े के शिक्षकों को पांच-छह हजार रुपये दे देते हैं। इससे विद्यालयों में पढ़ाई ठप हो रही है। जो शिक्षक आधारयुक्त अपना फोटो विद्यालयों में नहीं लगाते हंै, ऐसे शिक्षकों के वेतन रोक दिये जाये। यहीं नहीं, जेल के कैदियों को भी आधार कार्ड से जोड़ें। उक्त बातें मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सूचना भवन में आयोजित सीधी बात कार्यक्रम में कही, जब गिरिडीह के गोपीकृष्ण वर्मा ने यह शिकायत कर दी कि उत्क्रमित मध्य विद्यालय हारोडीह में छात्रों को राज्य सरकार द्वारा मिलनेवाला लाभ नहीं मिल रहा। 
मुख्यमंत्री रघुवर दास ने गुमला के उपायुक्त को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि हमारी बेटियां किसी भी बिचैलियों के चंगुल में न फंसे, उनका शोषण न हो। गुमला में ही इन बेटियों को रोजगार का अवसर प्रदान करायें। साथ ही उन लोगों को गिरफ्तार करें, जो राज्य की बेटियों को बहला-फुसलाकर पलायन करा रहे है। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने राज्य की सारी बेटियों को संदेश दिया कि वे किसी भी हालत में पलायन न करें, उनके रोजगार के प्रबंध के लिए राज्य सरकार हरसंभव कार्य करने को तैयार है। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सीधी बात कार्यक्रम में शिकायत करने आयी लालो कुमारी को कहा कि वह ऐसे लोगों को पर्दाफाश करे, जो ऐसी घटनाओं में लिप्त हैं। साथ ही गुमला के पुलिस अधिकारियों को सुनिश्चित करने को कहा कि लालो ने जिन लोगों पर प्राथमिकी दर्ज करायी है, उसे जल्द सलाखों के पीछे डाले। 
चतरा के चतरा कैंप निवासी रौशन की शिकायत थी कि रतन कुमार जायसवाल की हत्या कर दी गयी, पर उनके रिश्तेदारों को न तो अनुकम्पा के आधार पर नौकरी मिली और न ही क्षतिपूर्ति अनुदान राशि दी गयी। इस संबंध में मुख्यमंत्री रघुवर दास को वरीय पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अपराधिक वारदातों में मारे गये लोगों के लिए क्षतिपूर्ति का कोई प्रावधान नहीं है, पर अनुकम्पा के आधार पर नौकरी जल्द ही उपलब्ध करायी जा रही है।
बोकारो के लुकईया गांव के भोला शंकर अग्रवाल के जमीन संबंधी मामले में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भोला शंकर अग्रवाल को बोकारो के उपायुक्त से मिलने का आदेश दिया। जल संसाधन विभाग से संबंधित मामले में भालको में लिपिक पद पर कार्यरत विपता राम के 1997 में मृत्यु होने के बाद भी उनके परिवार को आजतक बकाये राशि का भुगतान नहीं होने पर, जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव सुखदेव सिंह ने मुख्यमंत्री को बताया कि यह मामला बिहार से संबंधित है, और इस संबंध में उन्होंने वहां के अधिकारियों से बातचीत की है। समस्या के समाधान में वे लगे हैं। दूसरी ओर मुख्यमंत्री ने विपता राम की पत्नी चिंता देवी की खराब आर्थिक हालत को देख एक लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की।
एनआईसी कालेज आदित्यपुर में पढ़ाई कर रहे उत्तम कुमार की मौत का मामला भी सीधी बात में गूंजा। उत्तम के पिता का कहना था कि उसके बेटे की सुनियोजित ढंग से हत्या कर दी गयी। जिसपर मुख्यमंत्री ने सरायकेला खरसावां के एसपी को घटनास्थल पर जाकर नये ढंग से जांच करने का आदेश दिया। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने यह भी कहा कि इसके बाद उच्चस्तरीय जांच की अनुशंसा करने की आवश्यकता पड़ेगी, तो वे इससे भी नहीं चूकेंगे। 
गोड्डा के शोभापुर के बलराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री रघुवर दास से शिकायत की कि गांव के मुख्य पथ से गड़िया पोखर होते हुए नेगचातर तक मिट्टी मोरम पथ निर्माण की स्वीकृत राशि 15 लाख 96 हजार रुपये थी, जिसमें मुखिया गुलनाज बेगम और पंचायत सेवक ने मिलकर 12 लाख की अवैध निकासी कर ली, पर आजतक इन दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, केवल प्राथमिकी दर्ज करके छोड़ दिया गया। इसपर मुख्यमंत्री रघुवर दास पुलिस अधिकारियों पर बरसे। उन्होंने कहा कि क्या प्राथमिकी दर्ज कर लेने से समस्या का समाधान हो गया। शीघ्र दोषियों को गिरफ्तार करें, न कि सुपरवीजन के नाम पर तमाशा खड़ा करें। ज्ञातव्य है कि ये मामला सीधी बात में 1 मार्च को भी उठा था।
हजारीबाग के बरही पंचमहादेव निवासी संजय रजक का कहना था कि मौजा 56 की रैयती जमीन डीवीसी ने अधिगृहीत कर ली, जिसके बाद कुछ अधिगृहीत जमीन में से कुछ जमीन रैयतों को लौटा दी गयी, पर रैयत जब अपनी वापसी जमीन का लगान कटाने जा रहे हैं, तो अंचल अधिकारी द्वारा रसीद नहीं काटी जा रही। जिस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से इस संबंध में जानकारी लेनी चाही। अधिकारियों का कहना था कि नये कानून का प्रावधान लागू करने में एक महीने लग जायेंगे, उसके बाद सब ठीक हो जायेगा। पाकुड़ में रैयती जमीन पर तालाब को समतलीकरण कर दिये जाने पर मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अधिकारियों को आदेश दिया कि अगर रैयती जमीन पर भी तालाब है, तो उसे समतलीकरण न कर, तालाब खुदवाने का कार्य करें।
इसी प्रकार सीधी बात में मुख्यमंत्री ने रामगढ़ के सुभाष कुमार गुप्ता, साहिबगंज के गोरखनाथ पासवान, देवघर के अजीत कुमार सिंह, हजारीबाग के विश्वनाथ प्रसाद, पाकुड़ के दीपनारायण तिवारी, पलामू के अक्षय कुमार सिंह की भी शिकायतें सुनी और उसका समाधान किया।